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कोरोना के बाद भूख की महामारी झेलेंगे देश के इतने करोड़ मजदूर!


Riya Rai
Riya Rai | 11 Apr, 2020 | 11:37 am

भारत कोरोना महामारी से निपटने में लगा है, कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश १८ दिन से लॉकडाउन है| सरकार के सामने कोरोना से देश को बचाने की चुनौती ख़त्म नहीं हुई है, और इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन की रिपोर्ट ने सरकार के सामने एक दूसरी बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है| सरकार के सामने चुनौती कोरोना के बाद देश के असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे करोड़ों मजदूरों के रोजी रोटी को लेकर है| आईएलओ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी भारत के असंगठित क्षेत्र में कार्यरत 40 करोड़ मजदूरों को गरीबी के अंधकार में धकेल सकती है| रिपोर्ट में कहा गया है की कोरोना संकट से निपटने के लिए लॉक डाउन के आलावा कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिसका असर रोजगारों और कमाई पर पड़ा है|

Main
Points
आईएलओ के मुताबिक देश के 40 करोड़ मजदुर को पड़ेगी रोजी रोटी की मार
आईएलओ ने कहा ऐसी चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार नहीं है भारत
भारत में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में कार्यरत 90% वर्कर्स पर रोजी-रोटी का संकट
हाउसिंग, फ़ूड सर्विस, मैन्युफैक्चरिंग,रिटेल और बिजनेस पर पड़ेगा ज्यादा असर

हालत से निपटने के लिए बेहतर ढंग से तैयार नहीं भारत

इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन का कहना है कि भारत उन देशों में शामिल है, जो इस तरह के हालात से निपटने के लिए बेहतर ढंग से तैयार नहीं है| जिनेवा में जारी आईएलओ रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की रोकथाम के लिए लॉक डाउन और दूसरे उपायों की वजह से भारत, नाइजीरिया और ब्राजील की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम कर रहे मजदूर ज्यादा प्रभावित हैं|

अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में कार्यरत 90% मजदूरों पर रोजी रोटी का संकट

इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन के रिपोर्ट में कहा गया है की भारत में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में 90% मजदूर काम करते हैं जिन पर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है| ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के इंडेक्स में भी भारत के लॉक डाउन को सबसे ऊपर रखा गया है| लॉकडाउन ने शहरों में काम करने वाले मजदूरों को काफी प्रभावित किया है और उन्हें गांव लौटने पर मजबूर किया है| रिपोर्ट में ये भी कहा गया है की जो देश पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं से लंबी लड़ाई और विस्थापन का सामना कर रहे हैं, उनपर महामारी का बोझ कई गुना बढ़ जाएगा| ऐसा इसलिए होगा क्योंकि यहां के लोगों के पास स्वस्थ्य और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का आभाव है| यहां कार्य स्थल पर बहुत अच्छे हालात नहीं हैं औ न ही सामाजिक सुरक्षा पर जोर है|

आईएलओ ने कहा काम के घंटे पर भी पड़ेगा महामारी का असर

इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन के रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी का वैश्विक स्तर पर काम के घंटे और कमाई पर बहुत बुरा असर पड़ेगा| महामारी के वजह से 2020 की दूसरी तिमाही में काम के कुल घंटो में 6.7% की कमी आ सकती है, जो 19.5 करोड़ मजदूरों के काम के बराबर है| और इसका सबसे ज्यादा असर अरब देशों में पड़ता दिख रहा है| अरब देशों में काम के घंटो में 8.1% कमी हो सकती है जो 50 लाख स्थायी वर्कर्स के काम के बराबर है| आईएलओ के मुताबिक यूरोप में यह आंकड़ा 7.8% रह सकता है, जो 1 करोड़ 20 लाख फुल टाइम वर्कर्स के काम के काम के बराबर है| वहीँ एशिया प्रशांत क्षेत्र में 12.5 करोड़ मजदूर इससे प्रभावित हो सकते हैं|

कमाई पर भी पड़ेगा असर

आईएलओ रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी की वजह से विभिन्न आय समूहों में भी भयंकर नुकसान की आशंका है| खासतौर पर अपर मिडिल इनकम वाले देशों की लोगों  की कमाई में करीब 7% की कमी हो सकती है, जो 2008-09 की आर्थिक मंडी से भी ज्यादा होगी| जिन क्षेत्रों पर इसका ज्यादा असर होगा इसमें हाउसिंग, फ़ूड सर्विस, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और बिजनेस शामिल हैं| जिसकी वजह से 2020 में बेरोजगारी भी बढ़ेगी|

ग्लोबल वर्कफोर्स में 81% लोग होंगे प्रभावित

आईएलओ के मुताबिक यह आंकड़ा उसके 2.5 करोड़ शुरूआती अनुमान से ज्यादा होगा| 3.3 बिलियन के ग्लोबल वर्कफोर्स में भी पांच में से चार (81%) लोग वर्तमान में वर्कप्लेस के पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद होने से प्रभावित हैं|

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