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ओज़ोन परत पर लॉकडाउन का उपकार, भर गया ओजोन परत में हुआ सबसे बड़ा छेद

कोरोना से जन जीवन को बचाने के लिए हुए लॉकडाउन के वजह से ओजोन परत में इतिहास का सबसे बड़ा छेद भर गया है| ओजोन परत पृथ्वी पर मौजूद जीवन को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती है| ओजोन परत पृथ्वी के ऊपर स्ट्रेटोस्फेयर परत के बीच में रहती है|

Riya Rai
Riya Rai | 27 Apr, 2020 | 4:09 pm

कोरोना को खत्म करने के लिए हुए लॉकडाउन के वजह से भले ही आज आज हर इंसान परेशान है| लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की इस लॉकडाउन का प्रकृति पर बहुत बड़ा उपकार हुआ है| लॉकडाउन के वजह से प्रकृति हो या  इस धरती पर मौजूद जीव जन्तु हो या पेड़ पौधे इन सबको राहत मिली है, सब चैन की सांस ले पा रहे हैं

Main
Points
पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के ऊपर है ओजोन परत
वैज्ञानिकों को दिखा था उत्तरी ध्रुव के ऊपर ओजोन परत में सबसे बड़ा छेद
वैज्ञानिकों ने देखा था 10 लाख वर्ग किलोमीटर का छेद
लॉकडाउन में कम हुए प्रदुषण के वजह से भर गया इतिहास का सबसे बड़ा छेद
अल्ट्रावायलेट किरणों से निकले क्लोरीन और ब्रोमिन परमाणु ओजोन परत को पतला कर रहे थे

ओजोन परत में दिखा था 10 लाख वर्ग किमी का छेद

इस साल अप्रैल के शुरुआत में उत्तरी ध्रुव के ऊपर स्थित ओजोन परत में वैज्ञानिकों ने 10 लाख वर्ग किलोमीटर का छेद दिखा था| वैज्ञानिकों के अनुसार यह इतिहास का सबसे बड़ा छेद था|  लॉकडाउन में कम हुए प्रदुषण की वजह से ये छेद अब भर गया है और यह एक बहुत बड़ा उपकार हुआ है और पृथ्वी पर मौजूद जीवों के लिए एक  खुशखबरी है|

पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के ऊपर है ओजोन परत

ओजोन परत पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के ऊपर स्थित है| वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे पहले भी लॉकडाउन के वजह से दक्षिणी ध्रुव के ओजोन परत का छेद कम हुआ था| इस महीने की शुरुआत यानि अप्रैल के शुरुआत में  उत्तरी ध्रुव के ओजोन परत पर एक बड़ा छेद देखा गया था| वैज्ञानिकों का मानना था की यह अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा छेद है जो 10 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला था|

आर्कटिक क्षेत्र के ऊपर बना पोलर वर्टेक्स हुआ ख़त्म

वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तरी ध्रुव यानि पृथ्वी के आर्कटिक क्षेत्र के ऊपर एक ताकतवर पोलर वर्टेक्स बना हुआ था जो अब ख़त्म हो गया है| उत्तरी ध्रुव के उवर बहुत उचाई पर स्थित स्ट्रेटोस्फेयर है और इसी स्ट्रेटोस्फेयर पर बन रहे बादलों के वजह से ओजोन परत पतली हो रही थी|

क्यों बढ़ता जा रहा था ओजोन परत का छेद?

ओजोन परत के छेद को कम करने के पीछे तीन सबसे बड़े कारण- बादल, क्लोरोफ्लोरोकार्बन्स और हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन्स हैं| स्ट्रेटोस्फेयर में इन तीनो चीजों की मात्रा यानी बादल, क्लोरोफ्लोरोकार्बन्स और हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन्सकी मात्रा बढ़ने के वजह से स्ट्रेटोस्फेयर में जब सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणे टकराती है तो उनसे क्लोरीन और ब्रोमीन के परमाणु निकल रहे थे| क्लोरीन और ब्रोमीन के यही परमाणु ओजोन पर को पतला कर रहे थे जिससे की ओजोन परत का छेद और बढ़ता जा रहा था| ओजोन परत के छेद को प्रदुषण और भी बढ़ा देता लेकिन लॉकडाउन ने ऐसा नहीं होने दिया|

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार आमतौर पर ऐसी स्थिति पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव यानी अंटार्कटिका वके ऊपर ओजोन परत में देखने को मिलता है| लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण उत्तरी ध्रुव के ऊपर ओजोन परत में ऐसा देखने को मिल रहा है| 

10 से लेकर 50 किलोमीटर तक होती है स्ट्रेटोस्फेयर परत

पृथ्वी के ऊपर स्ट्रेटोस्फेयर की परत 10 से लेकर 50 किलोमीटर तक होती है| बता दें की स्ट्रेटोस्फेयर के बीच रहती है ओजोन परत जो पृथ्वी पर मौजूद जीवन को सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती है|

Tags:
Corona Virus   |  Lockdown   |  Ozonehole   |  Earth   |  NASA   |  Scientist

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