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फिर जल उठा गुजरात, लॉकडाउन में हुआ कुछ ऐसा!

गुजरात के सूरत में हजारों मजदूरों ने सड़कों पर निकल लगाई आग, घर भेजने की मांग पर सरकार के खिलाफ प्रवासी मजदूरों के प्रर्दशन ने उग्र रुप इख़्तियार कर लिया और देखते ही देखते लॉकडाउन के सन्नाटे में अफरा-तफरी मच गई।

Suyash Tripathi
Suyash Tripathi | 12 Apr, 2020 | 5:02 pm

कोरोना तेजी के साथ विश्वभर में अपना पैर पसारता जा रहा है।कोरोना से लड़ाई में दुनियाभर के ज्यादातर देशों को लॉकडाउन किया जा चुका है। भारत को भी 21 दिनों के लिए पहले ही लॉकडाउन किया जा चुका है। लॉकडाउन के चलते आए दिन कई कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। बीते शुक्रवार को गुजरात के सूरत में हजारों मजदूर सड़कों पर निकल आए और सरकार से घर भेजने की मांग करने लगे। देखते देखते बवाल इतना आगे बढ़ गया कि मजदूरों ने आगजनी की घटना को अंजाम दे दिया।

Main
Points
सूरत में हजारों मजदूर सड़कों पर उतरे
आगजनी कर जताया आक्रोश
सरकार से घर जाने की कर रहे थे मांग

गौरतलब है कि देश की हीरा नगरी कहे जाने वाले गुजरात के सूरत में शुक्रवार को अचानक हाहाकार मच गया। एक साथ हजारों मजदूर सड़कों पर  उतर आए और जमकर हंगामा करने लगे।मजदूरों ने कई गाड़ियों और ठेलों में आग लगा दी। दरअसल, शुक्रवार की दोपहर तक सूरत में सब कुछ सामान्य था। लोगों में कोरोना की दहशत और सड़कों पर लॉकडाउन का सन्नाटा पसरा था। लेकिन शाम ढलते ही शहर के लसकाना इलाके कीखामोशी शोर शराबे में तब्दील हो गई। इलाके में रह रहे दूसरे राज्यों के सारे मजदूरों ने मोर्चा खोला और घर वापसी की मांग करने लगे। मजदूरोंका आरोप था कि उन्हें सैलरी नहीं मिल रही है तथा उनके पास राशन पानी के भी पैसे खत्म हो गए हैं। हालांकि खबर सुनते ही पुलिस ने मोर्चासंभाला और कई लोगों को हिरासत में लिया।

बता दें कि लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूरों को अपने राज्यों में वापस लौटने का मौका नहीं मिल पाया था। काम बंद होने के कारण उन्हें मूलभूत की चीजें भी मुहैया नहीं हो पा रहीं थी,  जिस कारण वे लगातार प्रशासन से अपने अपने राज्यों में लौटने की मांग कर रहे थे। सरकार का भी मानना है कि लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब-मज़दूर वर्ग ही है। केन्द्र और राज्य दोनों सरकारों ने मजदूरों के हित के लिए कई अहम फैसले भी लिए हैं। केन्द्र सरकार ने कमजोर आर्थिक वर्ग के लोगों के लिए 1.70 लाख करोड़ के विषेश आर्थिक पैकेज का भी एलान किया था।उत्तर प्रदेश सरकार ने भी 35 लाख मजदूरों को 1000 रुपये के आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी। जाहिर है कि मज़दूर वर्ग की आमदनी प्रतिदिन भत्ते पर निर्भर करती है, पर ऐसी स्थिति में आमदनी का श्रोत रुकने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन की वजह से श्रमिकों की कमी से उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में मजदूर कहीं मीलों पैदल चल अपनें घरों के लिए रवाना हो रहे हैं तो कहीं अपना रोष सकड़ों पर आगजनी कर निकाल रहे हैं।

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Corona effect   |  gujarat   |  riots   |  laborers   |  Vijay Rupani   |  Ind Govt   |  CM Yogi

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