Your image is ready, you can save / share this image
Please wait!
#MPsPerformance


%
RANKOUT OF

टेढ़ी खीर साबित होगी प्रवासियों की घर वापसी ?

पूरे देश में महाराष्ट्र और दिल्ली ही ऐसे दो राज्य हैं जहाँ अन्य राज्यों से आये प्रवासी लोगों की संख्या बहुतायत है। लॉकडाउन के बाद दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर प्रवासियों का मामला हो या मुंबई के बांद्रा स्टेशन के सामने का जमावड़ा प्रवासी मजदूरों की सबसे बड़ी भीड़ इन्हीं राज्यों में दिखी है।

Ankit Mishra
Ankit Mishra | 30 Apr, 2020 | 4:14 pm

गृह मंत्रालय द्वारा प्रवासियों के लिए जारी किये गए नए दिशा-निर्देश के बाद राज्य स्तर पर इसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। अन्य राज्यों में फंसे लोगों की सूची बनाने के साथ-साथ उनको वापस लाने की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद बिहार, यूपी, झारखण्ड, राजस्थान सहित तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र के इस कदम का स्वागत किया है। 

Main
Points
केन्द्र के दिशा-निर्देश के बाद राज्य स्तर पर तैयारियां शुरू
नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार का जताया आभार
अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख विशेष ट्रेन चलाने की मांग की

फैसले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया 

बिहार और झारखण्ड यह दो प्रमुख राज्य रहे जहां की सरकारें प्रवासी मजदूर और छात्रों के मुद्दे पर अपने राज्य के लोगों और विपक्षी नेताओं के सर्वाधिक निशाने पर रहीं। गृह मंत्रालय के इस निर्देश से संभवतः सबसे ज्यादा सुकून भी इन्हें ही मिला होगा। दिशा-निर्देश जारी होने के बाद नीतीश कुमार ने ट्वीट कर केंद्र सरकार का प्रवासियों के लिए पूरे देश में एक नीति बनाने के उनके अनुरोध को मानने के लिए आभार जताया। कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया झारखण्ड, राजस्थान और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों ने भी दी। 

हालाँकि इन राज्यों को यह अच्छे से ज्ञात है कि सीमित साधनों के साथ इतने बड़े स्तर पर लोगों का एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन कराना आसान कार्य नहीं है इसलिए कुछ राज्यों ने दिशा-निर्देश मिलने के तुरंत बाद ही अपनी आपत्तियां केंद्र के समक्ष रख, केंद्रीय सरकार से मदद की गुहार लगाई। 

रेल चलाने की मांग 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख अन्य राज्यों में फंसे लोगों को वापस लाने के लिए विशेष ट्रेन चलाने की मांग की। चूँकि केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देश में यह स्पष्ट है कि लोगों की वापसी सिर्फ बसों से सड़क के माध्यम से होगी। झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस समस्या पर केंद्र सरकार से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को वापस लाने में 6 माह का समय लग जायेगा। यह समस्या बिहार और उत्तर प्रदेश में और भी बड़ी है क्योंकि इन दोनों राज्यों से बाहर प्रदेशों में बड़ी संख्या में लोग प्रवास करते हैं। 

रजिस्ट्रेशन जारी 

प्रवासी लोगों को वापस लाने के लिए कुछ राज्यों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सबसे पहले यह प्रक्रिया ओडिशा ने शुरू की थी। ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने केंद्र के निर्देश के एक हफ्ते पहले ही अपने नागरिकों से ऑनलाइन आवेदन मंगाने का कार्य शुरू कर दिया था। वहीं राजस्थान सरकार ने भी प्रधानमंत्री से हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद से ऑनलाइन आवेदन मंगाने की शुरुआत की है। अशोक गहलोत द्वारा ट्वीट कर दी गई जानकारी के मुताबिक अभी तक 6 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं।

बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकार ने भी इस बाबत कार्य शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश ने हरियाणा की सूची तैयार कर वहां से लोगों को वापस बुलाना प्रारम्भ कर दिया है। इससे सम्बन्धित कोई जानकारी बिहार की तरफ से अभी तक नहीं मिली है। बिहार और यूपी से बड़ी संख्या में लोग महाराष्ट्र और दिल्ली में रहते हैं वहां से इच्छुक लोगों को वापस लाना टेढ़ी खीर साबित होगा। 

महाराष्ट्र और दिल्ली ने कसी कमर 

पूरे देश में महाराष्ट्र और दिल्ली ही ऐसे दो राज्य हैं जहाँ अन्य राज्यों से आये प्रवासी लोगों की संख्या बहुतायत है। लॉकडाउन के बाद दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर प्रवासियों का मामला हो या मुंबई के बांद्रा स्टेशन के सामने का जमावड़ा प्रवासी मजदूरों की सबसे बड़ी भीड़ इन्हीं राज्यों में दिखी है।

एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में 70 लाख प्रवासी मजदूर अन्य प्रदेशों से आ कर काम करते हैं जिनमें लॉकडाउन के बीच अब भी इसके आधे संख्या में लोग दिल्ली में हैं और घर जाने का इंतजार कर रहे हैं। दिल्ली सरकार से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार अन्य राज्यों के साथ संपर्क में है और इससे सम्बन्धित योजना अगले दो दिनों में बना ली जाएगी। 

बात अगर महाराष्ट्र की करें तो वहां से अकेले उत्तर प्रदेश के तक़रीबन 15 से 18 लाख लोगों के वापस आने की उम्मीद है। यूपी सरकार इस सूची पर अभी काम कर रही है लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बस से लाना संभव नहीं लगता। हालाँकि महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र की 1000 से  ज्यादा बसें लोगों को उनके गृह राज्यों में छोड़ने के लिए तैयार खड़ी हैं। महाराष्ट्र के कुछ यूपी एसोसिएशन के नेताओं ने प्रशासन से लोगों को अपने निजी वाहनों से या फिर अन्य वैकल्पिक साधनों से जाने की अनुमति मांगी है।

Tags:
Corona   |  migrants   |  up gov   |  Maharashtra   |  Ashok gahlot   |   High light

Stories for you

SEARCH YOUR MP

Or

Selected MP