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ड्रैगन की घटिया चाल पर भारत का करारा जवाब!

कोरोना की जांच के लिए दुनियाभर के देश रैपिड टेस्टिंग किट का इस्तेमाल कर रहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर इसमें फॉल्ट देखे जा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि भारत में रैपिड टेस्टिंग किट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है और फॉल्टी किटस् को वापस भी किया जा रहा है।

Suyash Tripathi
Suyash Tripathi | 24 Apr, 2020 | 6:07 pm

कोरोना महामारी लगातार अपना कहर बरपा रहा है, भारत में अब तक 23 हजार से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और मरने वालों का आंकड़ा 700 के पार जा चुका है। कोरोना वायरस संकट के मसले पर शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि, “देश अभी कोरोना की तीसरी स्टेज में नहीं गया है, लॉकडाउन ने कोरोना पर काबू पाने में काफी मदद की है। काफी कम समय में हमने देश में 350 से अधिक लैब बनाने का काम किया है , रैपिड किट को लेकर ICMR जांच कर रहा है, उसके नतीजे का इंतजार करना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि, “ देश में अबतक साढ़े पांच लाख से अधिक टेस्ट हो गए हैं, सरकार बेहतर तरीके से लोगों की मदद करने में जुटी है। लॉकडाउन के कारण कोरोना को रोकने में मदद मिली है, भारत में अभी स्टेज तीन नहीं आई है लेकिन जहां पर क्लस्टर बन गए हैं, उन पर काम किया जा रहा है।”

Main
Points
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों से की बात
रैपिड टेस्टिंग किट के इस्तेमाल पर भारत ने लगाया रोक
करीब 8.5 लाख किट भारत भेज चुका है चीन
सर्विलांस और मॉनिटिरिंग के लिए इस किट का होता है इस्तेमाल
ब्रिटेन सरकार ने पहले ही किट के आयात पर लगा दी थी रोक

बता दें कि रैपिड किट में खामियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रहीं थी। केंद्र सरकार ने रैपिड किट के इस्तेमाल पर राज्य सरकारों को भी दिशा निर्देश जारी किया था, जिसमें किट के उपयोग को तुरंत प्रभाव से रोकने का आदेश दिया गया था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने किट के बारे में जानकारी साझा करते हुए वताया कि किटस् को उनके संबंधित देशों को वापस किया जाएगा। जिसमें चीन भी शामिल है। इन किट को कोरोना संक्रमण की जांच करने के लिए मंगाया गया था लेकिन यह भारतीय मापदंडों पर खरी नहीं उतरी हैं। जिसके वजह से इन्हें लौटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इनके लिए अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। 

स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बात की। जिसमें उन्होंने कहा कि “सभी दोषपूर्ण एंटीबॉडी परीक्षण किट को लौटा दिया जाएगा। बेशक उन्हें किसी भी देश से क्यों न खरीदा गया हो, जिसमें चीन भी शामिल है। हमने अभी तक एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया है।” राज्य स्वास्थ्य मंत्रियों से बातचीत में उन्होंने कहा, “जब भी जरुरत होगी हम आपकी मदद के लिए अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भेज देंगे। उन्हें निगरानी करने के लिए नहीं भेजा जाएगा। वे आपका हाथ थामने और सहयोग के लिए हैं। ताकि हमें आगे आपकी मदद के लिए फीडबैक मिल सके।”

गौरतलब है कि चीन की वांडोफ बायोटे व लिवजोन डायग्नोस्टिक ने अब तक करीब 40 करोड़ की 8.5 लाख किट भारत को भेजी हैं। वांडोफ बायोटेक की 60 फीसदी से ज्यादा किट्स आई हैं। इसी कंपनी ने 20 लाख किट्स ब्रिटेन सरकार को मार्च में दी थीं। वहां शुरुआती जांच में ही गड़बड़ी पकड़ने के बाद रोक लगा दी थी। भारत में चीन से आईं इन किटस् में ज्यातर किटस् फॉल्टी निकली हैं।हालांकि इस किट का इस्तेमाल सिर्फ सर्विलांस और मॉनिटिरिंग के लिए ही होता है लेकिन ऐसी संकट की स्थिति में इन किट के महत्व को नकारा भी नहीं जा सकता है।

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Corona   |  Corona pandemic   |  rapidkit   |  MoHFW   |  Dr Harshvardhan   |  China   |  Ind Govt

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