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मुफ्त राशन को लेकर मोदी और नीतीश सरकार आमने -सामने


PB Desk
PB Desk | 04 May, 2020 | 6:10 pm

मुफ्त राशन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार लड़ रही है जबकि सूबे की जनता बदहाली पर आंसू बहा रही है 

Main
Points
मुफ्त राशन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तना-तनी
असली झगड़ा दाल को लेकर
बिहार सरकार ने 30 लाख परिवारों के लिए अतिरिक्त अनाज की मांग को किया ख़ारिज

करोना संकट के बीच  बिहार में राशन को लेकर राजनीति गरमा गई है। यह राजनीति स्वतः स्फूर्त है या फिर विपक्ष के इशारे पर ,कहना मुश्किल है। लेकिन सच यही है कि इस राजनीति ने पक्ष और विपक्ष को परेशान कर रखा है। खबर के मुताविक बिहार में ये लड़ाई पहले आम लोगों के बीच ही शुरू हुई। फिर लड़ाई जनता और राशन की दूकान तक पहुंची। फिर लड़ाई पटना तक गई। पटना में इस लड़ाई में राजनीति  ढुंढी गई और फिर ूिश लड़ाई का बड़ा प्लाट तैयार किया गया। अब इस खेल में केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह से समा गई है। पीएम मोदी और सीएम नीतीश के बीच की यह लड़ाई अब रोचक होती जा रही हैं। खबर है कि राशन को लेकर शुरू हुई इस लड़ाई में अब पीएम मोदी दखल भी कर रहे हैं। पीएम के दखल से लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है।

दरअसल . लॉकडाउन की वजह से राज्य में सभी कार्डधारकों को तीन महीने का राशन मुफ्त मिलना है। लेकिन इस मुफ्त राशन को लेकर जो घोषणा की गई वह साफ़ नहीं है। राज्य सरकार ने कहा था कि प्रति यूनिट पांच किलो अनाज या गेहूं और एक किलो दाल का वितरण किया जाएगा। इसकी घोषणा खुद उप मुख्यमंत्री सुशील  मोदी ने की थी।

असली झगड़ा दाल को लेकर 

यहां तक तो सब ठीक था। लेकिन  जब लोग राशन लेने पहुंचे तो केवल पांच किलो चावल दिया गया। गेहूं और दाल नहीं। लोग नाराज हो गए। हल्ला होना शुरू हुआ। एक जगह से शुरू हुआ यह विवाद धीरे धीरे राज्य भर में फ़ैल गया। कई जगह मारपीट की नौबत भी आई। गाली गलौज पर उतर गए लोग। सरकार के पास पूरी जानकारी भेजी गई। सरकार भी तल्ख़ हुई लेकिन सामने चुनाव देख कर मुरझा भी गई। फिर राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी सामने आए। उनका बयान सामने आया।  सुशील मोदी ने कहा कि दाल मिलने में थोड़ी देरी हो रही है लेकिन मिलेगा जरूर। इस बयान के बाद और राजनीति  गरमा गई। शायद विपक्ष भी इसमें लाभ देखने लगा। जनता की तरफ से सवाल दागे गए। मोदी जी से पूछना चाहिए कि अगर वक़्त पर सरकार दाल भी नहीं दे सकती तो क्या कर सकती है? दूसरा सवाल ये कि जब बिना दाल के या दाल ख़रीदकर खा ही लेंगे तो बाद में दाल देने का क्या फ़ायदा?  

झगड़े में राशन अनाज ख़ारिज !

लड़ाई आगे और बढ़ी। मंत्रियों के बीच लड़ाई पहुंची।  अब केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच विवाद शुरू हो गया है।  ख़बर है कि केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने बिहार सरकार द्वारा 30 लाख परिवारों के लिए अतिरिक्त अनाज की मांग को ख़ारिज कर दिया।  इसके बाद बिहार बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी ने इस मामले में पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान का कहना है कि अनुमान के आधार पर अनाज का आवंटन नहीं किया जा सकता। 2013 में बने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के में साफ़ कहा गया है कि जिन्हें अनाज मिलना है उस सूचि में सुधार जरुरी है। वहीं राज्य के खाद्य मंत्री का कहना है कि इस आधार पर तो 2021 में होने वाली जनगणना से पहले किसी ग़रीब को अनाज नहीं मिलेगा। मंत्री ने कहा है कि लॉकडाउन की वजह से बिहार में कई ऐसे परिवार हैं जिनका राशन कार्ड नहीं है लेकिन उन्हें इस बंदी में अनाज चाहिए।  यह खेल और कहा तक चलेगा कहना मुश्किल है।

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