Your image is ready, you can save / share this image
Please wait!
#MPsPerformance


%
RANKOUT OF

सांसद निधि की कटौती पर कांग्रेस के सांसद ही एक दूसरे के सामने, जवाबदेही के तर्क पर बहाली की मांग की!


Ankit Mishra
Ankit Mishra | 07 Apr, 2020 | 5:43 pm

“अब एक सांसद अपने क्षेत्र के विकास प्रक्रिया में महज़ एक दर्शक की भूमिका निभाएगा। सरकार ने जन प्रतिनिधि से उसका अधिकार छीनने का काम किया है” यह वक्तव्य है केरल के कोल्लम लोकसभा क्षेत्र से सांसद और सदन में मुखर वक्ता एन. के प्रेमचंद्रन का। इनके अनुसार सरकार ने सांसद निधि को दो साल के लिए स्थगित करने का जो फैसला लिया गया है वह पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। यह फैसला लोकसभा का प्रभुत्व और जन प्रतिनिधि के अधिकार को काम करने का काम करेगा।

Main
Points
कांग्रेस नेताओं में मतभेद, जयराम रमेश और कार्ति चिदंबरम आमने-सामने
सांसद निधि 2 साल के लिए स्थगित, सांसदों के सैलरी में भी कटौती
एन. के प्रेमचंद्रन ने बताया कटौती के फैसले को अलोकतांत्रिक

मंत्रिमंडल ने लिया था निर्णय

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कोरोना संकट के मद्देनज़र भारत में कोविड 19 के प्रभाव के प्रबंधन के लिए सांसदों को मिलने वाली निधि (MPLAD) को 2 साल के लिए अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया गया था। इन कटौतियों से अर्जित हुई राशि का उपयोग भारत की संचित निधि (consolidated fund) में किया जाएगा।

सरकार के इस फैसले पर विपक्षी सांसदों द्वारा मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ सांसदों ने इस फैसले का स्वागत किया तो वहीं कुछ सांसदों ने इस फंड को स्थगित न करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को चिठ्ठी भी लिखी है।

विपक्ष की राय जुदा

कांग्रेस ने सांसदों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती के निर्णय का स्वागत किया लेकिन सांसद निधि को दो साल के लिए निलंबित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे संसदीय क्षेत्रों में विकास कार्यों को नुकसान होगा। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सरकार से सांसद निधि को बहाल करने की अपील की।

तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सासंद निधि को बहाल करने की मांग की। शशि थरूर ने अपने पत्र में लिखा कि चूंकि अब सांसद निधि का पैसा केंद्र से आवंटित किया जाएगा इसलिए यह पैसा 543 लोकसभा क्षेत्रों की जरूरतों के बजाए केंद्र की प्राथमिकता और वरीयता के आधार पर दिया जायेगा।

Parliamentary Business पर ओवरआल परफॉरमेंस में नं. एक रेटिंग के सांसद एन. के प्रेमचंद्रन ने कहा कि वह पहले ही अपनी निधि से 2.65 करोड़ की राशि क्षेत्र के हॉस्पिटल को वेंटिलेटर्स खरीदने और कोरोना जाँच करने के लिए दे चुके हैं। उनके अनुसार क्षेत्र में इस राशि के इस्तेमाल के लिए सांसद ही उचित व्यक्ति है।

घर में ही फूट

सरकार के इस फैसले पर कांग्रेसी नेताओं में आपस में ही मतभेद नजर आया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद जयराम रमेश और राजीव गौड़ा ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया जिस पर पी. चिदंबरम के बेटे और लोकसभा सांसद कार्ति चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा कि "इस तरह की टिप्पणी वही व्यक्ति कर सकता है जिसने कभी चुनाव न लड़ा हो और जिसकी जवाबदेही सीधे जनता के प्रति न हो"

एनडीए सांसदों ने किया स्वागत

एनडीए सांसदों ने इस फैसले का पुरज़ोर समर्थन किया। उनके अनुसार सरकार के इस फैसले से मिलने वाली 7900 करोड़ की राशि कोरोना से लड़ने में सहायक होगी। इस विपदा की घड़ी में सांसदों का यह योगदान आर्थिक मोर्चे पर संजीवनी का कार्य करेगी।

मेरठ से भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने भी सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि संकट के इस समय में प्रत्येक स्तर पर सांसदों को नेतृत्व करना चाहिए और आर्थिक दृष्टि से जो कुछ भी योगदान हो वह देना चाहिए।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में संसद अधिनियम, 1954 में बदलाव कर सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई। इस आदेश के तहत 1 अप्रैल, 2020 से एक साल के लिए भत्ते और पेंशन को 30 फीसदी की कटौती की जाएगी। इनके अलावा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपालों ने भी स्वेच्छा से वेतन में कटौती का फैसला किया है।

Tags:
MP lad   |  inc   |  nda   |  BJP   |  Shashi Tharoor   |  Covid-19,

Stories for you

SEARCH YOUR MP

Or

Selected MP