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तेल का खेल !

अमेरिका के वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) मार्केट में कच्चा तेल मई में गिरकर माइनस 37.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था जो आज संभलकर 24.41 पर आ गया है । दुनियाभर में लॉकडाउन को देखते हुए जिन कारोबारियों ने मई के लिए सौदे किए हैं वे अब इसे लेने को तैयार नहीं हैं । कच्चे तेल की यह गिरावट दुनिया सहित भारत की इकोनॉमी के लिए भी कोई अच्छी खबर नहीं है ।

Abhishek Dubey
Abhishek Dubey | 06 May, 2020 | 4:06 pm

दुनिया भर में तेल ने हमेशा खलबली ही मचाई है। कभी इस तेल ने लोगों को झुलसाया। कभी यह संगठित आतंक का कारण बना तो कभी पानी की तरह सस्ता हो गया। तेल के दाम बढ़ते हैं तो कुछ देशों की अर्थव्यवस्थाएं डांवाडोल हो जाती हैं, जब तेल सस्ता होता है तो उन्हें राहत मिलती है। तेल उत्पादक देश अपने-अपने हितों और मुनाफे के लिए तेल के दाम को बढ़ाते और घटाते रहे हैं।आपको बतादें कि अमेरिकी बाजार में कच्चे तेल की कीमत $0 प्रति बैरल से भी नीचे चली गई थी। यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं है हालांकि भारत के लिए लंदन का ब्रेंट क्रूड ज्यादा मायने रखता है।

Main
Points
अमेरिकी बाजार में कच्चा तेल शून्य डॉलर प्रति बैरल से भी कम
भारत के लिए लंदन का ब्रेंट क्रूड ज्यादा मायने रखता है
कच्चे तेल का टूटना इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर नहीं
इसका भारतीय इकोनॉमी पर भी असर पड़ सकता है
दिल्ली के बाजार में पेट्रोल जहां 71.26 रुपये प्रति लीटर तो डीजल 69.39 रुपये प्रति लीटर

भारत को क्या पड़ता है फर्क

अब इस बात को समझना जरूरी है कि वैसे अमेरिकी बाजार में कच्चा तेल अगर मुफ्त भी हो जाता है तो पेट्रोलियम कीमतों के लिहाज से भारत को बहुत फर्क क्यों नहीं पड़ता। असल में भारत में जो तेल आता है वह लंदन और खाड़ी देशों का एक मिश्रित पैकेज होता है जिसे इंडियन क्रूड बास्केट कहते हैं। इंडियन क्रूड बास्केट में करीब 80 फीसदी हिस्सा ओपेक देशों का और बाकी लंदन ब्रेंट क्रूड तथा अन्य का होता है। यही नहीं दुनिया के करीब 75 फसदी तेल डिमांड का रेट ब्रेंट क्रूड से तय होता है। यानी भारत के लिए ब्रेंट क्रूड का रेट महत्व रखता है, अमेरिकी क्रूड का नहीं। सोमवार को जून के लिए ब्रेंट क्रूड का रेट करीब 26 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि मई के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा रेट 23 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। इसमें भी नरमी आई, लेकिन यह बहुत ज्यादा नहीं टूटा।

आज के भाव की बात करें तो ब्रेंट क्रूड करीब 30.96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है और इंडियन बॉस्केट का क्रूड करीब 23.38 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है। यानी भारत के लिए कच्चा तेल अब भी 23.38 डॉलर प्रति बैलर के आसपास है ।

डब्लूटीआई वह क्रूड ऑयल होता है, जिसे अमेरिका के कुंओं से निकाला जाता है। ढुलाई के लिहाज से इसे भारत लाना आसान नहीं होता। सबसे अच्छी क्वालिटी का कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड माना जाता है। दूसरी तरफ, खाड़ी देशों का यानी दुबई/ओमार क्रूड ऑयल थोड़ी हल्की क्वालिटी का होता है, लेकिन यह एशियाई बाजारों में काफी लोकप्रिय है। ब्रेट क्रूड और WTI क्रूड की कीमत में अक्सर कम से कम 10 डॉलर प्रति बैरल का अंतर देखा जाता रहा है। इस कीमत पर ओपेक देशों का काफी असर होता है।

कहां से आता है देश का 85 फीसदी कच्चा तेल?

भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की मांग भले ही तेजी से बढ़ी हों, लेकिन उत्पादन पर्याप्त नहीं है। ऐसे में हमें अपनी आवश्यकता का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करना पड़ता है। जाहिर है कि यदि विदेशी बाजार में यह महंगा होता तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा और कच्चा तेल सस्ता होगा तो पेट्रोलियम उत्पाद सस्ता होता है । लेकिन अभी ऐसा दिख नहीं रही है।

आइए, हम समझाते हैं कि आपके एक लीटर पेट्रोल की कीमत में क्या क्या शामिल है।

तेल के खेल में सरकार का बड़ा हाथ

पिछली बार साल 2014 से 2016 के बीच कच्चे तेल के दाम तेजी से गिर रहे थे तो सरकार इसका फायदा आम लोगों को देने के बजाय एक्साइज ड्यूटी प्लस रोड सेस के रूप में अपनी आमदनी बढ़ाती रही। नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच केंद्र सरकार ने 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई और केवल एक बार राहत दी। ऐसा करके साल 2014-15 और 2018-19 के बीच केंद्र सरकार ने तेल पर टैक्स के जरिए 10 लाख करोड़ रुपये कमाए। वहीं राज्य सरकारें भी इस बहती गंगा में हाथ धोने से नहीं चूकीं। पेट्रोल-डीजल पर वैट ने उन्हें मालामाल कर दिया। साल 2014-15 में जहां वैट के रूप में 1.3 लाख करोड़ रुपये मिले तो वहीं 2017-18 में यह बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस बार भी जब कीमतें घटनी शुरू हुई तो केंद्र सरकार ने इस पर टैक्स बढ़ा दिया।

दिल्ली सरकार ने बढ़ाये तेल के दाम

दिल्ली सरकार ने पेट्रोल पर वैट 27% से बढ़ाकर 30% कर दिया है और डीजल पर वैट 16.75% से बढ़ाकर 30% 

कर दिया है। इसके चलते दिल्ली में आज से पेट्रोल 1.67 रुपये और डीजल 7.10 रुपये महंगा हो गया है। तेल कंपनियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 71.26 रुपये का होगा।

18 रुपये लीटर वाले पेट्रोल पर 49.42 रुपये का टैक्स

जब आप 71 रुपये लीटर की दर से पेट्रोल खरीदते हैं तो सारा पैसा पेट्रोल कंपनियों को नहीं देते हैं। इसमें से आधा से ज्यादा पैसा तो टैक्स के रूप में केंद्र और राज्य को जाता है। देश की सबसे बड़ी ऑइल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑइल से मिली जानकारी के मुताबिक इस समय दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत एक्स फैक्ट्री कीमत या बेस प्राइस 17.96 रुपये है। इसमें केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी के रूप में 32.98 रुपये, ढुलाई खर्च 32 पैसे, डीलर कमीशन 3.56 पैसे और राज्य सरकार का वैट 16.44 रुपये होता है। राज्य सरकार का वैट डीलर कमीशन पर भी लगता है। कुल मिलाकर पेट्रोल की कीमत 71.26 रुपये हो जाती है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार का टैक्स 49.42 रुपये है।

6 मई 2020 को दिल्ली में टैक्स सहित एक लीटर पेट्रोल की कीमत

एक्स फैक्ट्री कीमत    17.96 रुपये

भाडा़ व अन्य खर्चे      32.98 रुपये

एक्साइज ड्यूटी         32.98 रुपये

डीलर का कमीशन     3.56 रुपये

VAT                         6.44 रुपये

आपके लिए दाम       71.26 रुपये

डीजल पर भी कम टैक्स नहीं

सरकार डीजल पर भी टैक्स वसूलने में पीछे नहीं है। दिल्ली में एक लीटर डीजल की एक्स फैक्ट्री कीमत या बेस प्राइस 18.49 पैसे है। इस पर प्रति लीटर ढुलाई खर्च 29 पैसे है। केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी 18.78 रुपये, डीलर कमीशन 2.52 रुपये और राज्य सरकार का वैट 16.26 रुपये पड़ता है। इस तरह से इसकी कीमत 69.39 रुपये हो जाती है। इस पर केंद्र और राज्य सरकार का प्रति लीटर टैक्स 48.09 रुपये है।

6 मई 2020 को दिल्ली में टैक्स सहित एक लीटर डीजल की कीमत

एक्स फैक्ट्री कीमत    18.49 रुपये

भाडा़ व अन्य खर्चे       0.29 रुपये

एक्साइज ड्यूटी          31.83 रुपये

डीलर का कमीशन      2.52 रुपये

VAT                         16.26 रुपये

आपके लिए दाम        69.39 रुपये

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