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लॉकडाउन से तबाह अर्थव्यवस्था पर आरबीआई का मरहम, जानिए क्या क्या हुईं घोषणाऐं!


Manmeet Singh
Manmeet Singh | 17 Apr, 2020 | 2:37 pm

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भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उनकी घोषणाओं के केंद्र में आम इंसान, किसान और छोटे उद्योगों को राहत पहुंचाना शामिल रहा। इस समय कोरोनावायरस की वजह से दुनिया आर्थिक संकट से दो-चार हो रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और हर जरूरी प्रावधान करने को तैयार है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के जारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस साल भारत की आर्थिक विकास दर 1.9% रहने की उम्मीद है और अगले साल भारत 7.4% की विकास दर हासिल करने में सक्षम होगा।

Main
Points
NABARD, SIDBI, NHB को 50 हजार करोड़ की आर्थिक सहायता
आईएमएफ ने बताई भारत की विकास दर 1.9% अनुमानित
2021-22 में भारत हासिल कर लेगा 7.4% की विकास दर
जी-20 देशों के मुकाबले हमारी स्थिति काफी बेहतर
विश्व अर्थव्यवस्था को 9 ट्रिलियन डॉलर के नुकसान होने की आशंका

भारतीय रिजर्व बैंक की प्रमुख घोषणाएं

NABARD,SIDBI, NHB को आर्थिक सहायता

भारतीय रिजर्व बैंक ने इन तीनों संस्थानों को 50 हज़ार करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। इस कदम से नाबार्ड को निगरानी, पुनर्वास योजनाओं के निर्माण, ऋण वितरण और कर्मियों के प्रशिक्षण सहित भारत में ऋण वितरण प्रणाली की क्षमता बढाने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण बैंकिंग, और कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा साथ ही साथ क्षेत्रों में कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण देने के संचालन के साथ-साथ सभी मामलों से निपटने में मदद मिलेगी। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फसल की कटाई जारी है और इस साल मॉनसून सामान्य रहने की उम्मीद है।

सिडबी को दी गई आर्थिक मदद एमएसएमई सेक्टर में जान फूंक देगी। व्यापार क्षेत्र में माइक्रो, स्माल और मझौले उद्यम (MSME) शामिल हैं, जो उत्पादन , रोजगार और निर्यात के मामले में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

इस समय यह सारे क्षेत्र संसाधनों की कमी एवं तरलता की अनुपलब्धता की वजह से मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। MSME sector भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है क्योंकि यह 5.1 करोड़ इकाइयों के विशाल नेटवर्क के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी मदद करता है। उन्होंने कहा कि इस आर्थिक सहायता से कोविड-19 से उपजी परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलेगी।

रिवर्स रेपो रेट में कटौती

कैश फ्लो के संकट से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है जिससे नई दर 3.75% है। इससे बैंकों को बाजार में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा जिससे तरलता में बढ़ोतरी होगी। भारतीय रिजर्व बैंक के पास जमा किए गए बैंकों के धन पर जिस दर से ब्याज मिलता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। बैंक रेट और रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की गई है इसलिए यह क्रमश 4.4% और 4.65% हैं। अगले सरकारी आदेश तक बैंकों के लाभांश ना बांटने की भी बात उन्होंने कही। इन सब बातों से यह साफ होता है कि वह बैंकों के पास पैसा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना चाहते हैं जिससे भारतीय बाजार में तरलता की कमी ना हो।

अन्य प्रमुख घोषणाएं

अन्य प्रमुख घोषणाओं में LCR को 100% से घटाकर 80% कर दिया गया है जिसे बाद में क्रमवार तरीके से 1 अक्टूबर को प्रसन्न 90% और 1 अप्रैल 2021 तक 100% कर दिया जाएगा। TLTRO 2.0 के तहत 50 हज़ार करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की जिससे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और MFI को पर्याप्त तरलता प्राप्त हो सके। यह क्षेत्र भी पैसों की कमी की भारी संकट से जूझ रहा है।

ये भी रहीं खास बातें

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत की स्थिति बाकी जी-20 देशों के मुकाबले बेहतर है। इस साल विश्व अर्थव्यवस्था को 9 ट्रिलियन डॉलर के नुकसान होने की आशंका है। विश्व व्यापार संगठन के मुताबिक विश्व व्यापार के 13 से 32 फ़ीसदी तक सिकुड़ने की आशंका है। भारतीय बाजार में तरलता की कमी नहीं है। बैंक और एटीएम अपनी पूरी क्षमता से कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि इस वक्त भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 476.5 बिलियन डॉलर है। क्वॉरेंटाइन में रहकर भी अपने काम को लगातार अंजाम दे रहे भारतीय रिजर्व बैंक के डेढ़ सौ कर्मचारियों का भी उन्होंने शुक्रिया अदा किया।

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