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क्या है रानी की पूरी कहानी ?

विवादों में रही 2014 बैच की आईएएस रानी नागर ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं। उन्होंने हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा को इस्तीफा भेजा है। रानी नागर इस समय सामाजिक सुरक्षा विभाग में अतिरिक्त निदेशक के पद पर तैनात हैं। उन्होंने पिछले दिनों अपनी जान को खतरा बताते हुए एक वीडियो भी जारी किया था और उन्होंने लॉकडाउन के बाद इस्तीफा देने की बात कही थी। लेकिन अचानक इस्तीफा देने से वो एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई है। उन्होंने नौकरी करते हुए व्यक्तिगत सुरक्षा इस्तीफे की वजह बताई है।

Abhishek Dubey
Abhishek Dubey | 06 May, 2020 | 7:17 pm

आइएएस से इस्तीफा देने वाली रानी नागर अपनी बहन रीमा के साथ 14 दिन के सेल्फ आइसोलेशन (एकांतवास) में चली गई हैं। इस दौरान वह गाजियाबाद स्थित घर में रहेंगी और किसी के संपर्क में नहीं आएंगी। दूसरी तरफ उनके इस्तीफे पर सियासी घमासान छिड़ गया है। केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर जहां उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने में जुटे हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला व हरियाणा कांग्रेस की प्रधान कुमारी सैलजा ने इसे मुद्दा बनाते हुए हरियाणा सरकार पर जुबानी हमला बोल दिया है। इस सबके बीच रानी नागर के इस्‍तीफे पर तकनीकी पेंच फंसने की संभावना है।

Main
Points
रानी नागर ने हरियाणा के मुख्य सचिव को भेजा इस्तीफा
व्यक्तिगत सुरक्षा बताई इस्तीफे की वजह
14 दिन के लिए अपनी बहन के साथ एकांतवास में रहेंगी
सरकार ने नहीं लिया है इस्तीफे पर कोई फ़ैसला

त्यागपत्र में शामिल कुछ बिंदुओं पर फंस सकता तकनीकी पेंच

प्रदेश सरकार ने अभी रानी नागर के इस्तीफे पर कोई निर्णय नहीं लिया है। हरियाणा काडर की 2014 बैच की आइएएस रानी नगर ने  मुख्य सचिव को प्रेषित इस्तीफे में सरकारी ड्यूटी पर निजी सुरक्षा को खतरा बताते हुए त्यागपत्र को तत्काल प्रभाव से यानी कि 4 मई से ही इफेक्टिव (प्रभावी) स्‍वीकृत करने का अनुरोध किया है। त्यागपत्र देने की स्थिति में यह उल्लेख होना चाहिए कि इस्तीफा आइएएस की सेवा से दिया जा रहा है न कि किसी पद से। उसे केवल त्यागपत्र देने की तारीख लिखनी होती है और इसके प्रभावी होने के उल्लेख की जरूरत नहीं होती। जिस दिन सक्षम प्राधिकारी त्यागपत्र को स्वीकार करेंगे, वह उसी दिन से ही प्रभावी माना जाएगा। त्यागपत्र का कारण भी लिखना अनिवार्य होता है, पर रानी नागर ने सरकारी ड्यूटी पर निजी सुरक्षा का कारण लिखा है जबकि उसके स्थान पर सरकारी ड्यूटी पर निजी सुरक्षा को खतरा या भय लिखना अधिक उपयुक्त होता। इन तकनीकी कारणों से उनके त्यागपत्र स्वीकार होने में कई पेंच फंस सकते हैं

इस्तीफा वापस लेने का विकल्प खुला

नियमों के अनुसार आइएएस अधिकारी के त्यागपत्र स्वीकार करने की सक्षम अथॉरिटी केंद्र सरकार के कार्मिक राज्यमंत्री होते हैं। प्रदेश सरकार जांच करती है कि अधिकारी के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई या जांच लंबित न हो और कोई देनदारी तो नहीं है। ऐसा न होने पर प्रदेश सरकार अपनी टिप्‍पणी दर्ज कर त्यागपत्र केंद्र को भेज देती है। अगर त्यागपत्र स्वीकार होने से पहले अधिकारी इसे वापस लेने के लिए लिख कर दे देता है तो त्यागपत्र खुद ही वापस लिया माना जाएगा और उसके स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता। केंद्र सरकार कुछ विशेष परिस्थितियों में त्यागपत्र वापस लेने की अनुमति दे सकती है।

बसपा सुप्रीमों उतरीं रानी के पक्ष में 

मायावती ने बुधवार को ट्वीट कर सवाल किया, ''हरियाणा की महिला आईएएस अफसर रानी नागर को, ’नौकरी के दौरान अपनी जान को खतरे’ के कारण अन्ततः अपनी नौकरी से ही इस्तीफा देकर वापस अपने घर यूपी लौट आना पड़ा है, जो अति-दुःखद व अति-दुर्भाग्यपूर्ण। महिला सुरक्षा व सम्मान के मामले में ऐसी सरकारी उदासीनता व अन्यों की चुप्पी क्यों?"

मायावती से पहले बसपा के दादरी विधानसभा के प्रभारी नरेंद्र भाटी ने मंगलवार को आईएएस रानी नागर के इस्तीफे पर रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि बसपा आईएएस रानी नागर के साथ है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को इस प्रकरण से अवगत कराया गया है।

कौन हैं रानी नागर

रानी नागर उत्तर प्रदेश के गाजिबाद की रहने वाली हैं। रानी नागर 2014 बैच हरियाणा कैडर की आईएएस अफसर हैं। रानी नागर दिसंबर 2019 से अपनी बहन के साथ चंडीगढ़ के सेक्टर-6 स्थित यूटी गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 311 में किराए पर रह थी। जो अब अपने घर गाजियाबाद लौट चुकी हैं। रानी ने जून 2018 में पशुपालन विभाग में अतिरिक्त सचिव रहते एक अफसर पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जिसे लेकर वो सुर्खियों में आई थीं। रानी 14 नवंबर 2018 से अतिरिक्त निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व 7 मार्च 2020 से निदेशक अर्काइव का जिम्मा संभाल रही हैं।

पहले भी रहा है विवादों से नाता

रीना नागर का विवादों से पुराना नाता है। पहली बार जून 2018 में सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने हरियाणा के एक अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के नौकरशाह पर परेशान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने हरियाणा राज्य महिला आयोग के समक्ष एक शिकायत भी दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ "दोहरे अर्थ वाले शब्दों" में बात करते थे और यहां तक कि उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) को भी खराब करने की धमकी देते थे।

रानी नागर ने बाद में अपनी जान को खतरा देखते हुए पुलिस में वरिष्ठ नौकरशाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थीं। उसके द्वारा दायर एक शिकायत चंडीगढ़ अदालत के समक्ष भी लंबित है। इससे पहले, दिसंबर 2017 में सिरसा जिले में डबवाली के एसडीएम के रूप में तैनात रहने के दौरान, उसने अज्ञात व्यक्ति से अपनी जान को खतरा होने की शिकायत की थी और साथ ही एक पुलिस शिकायत भी दी थी। उसने अपने द्वारा की गई सभी शिकायतों और उसकी शिकायतों को संबंधित दस्तावेजों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड कर दिया है। अप्रैल 2018 में,अपने वाहन में सो रहे अपने बंदूकधारी गार्ड का वीडियो अपलोड किया था, जब वह एसडीएम डबवाली के रूप में आधिकारिक कार में यात्रा कर रही थीं ।

टैक्सी चालक के खिलाफ भी करा चुंकी हैं शिकायत दर्ज

जुलाई 2018 में, उन्होंने पंजाब के खारार पुलिस को एक टैक्सी चालक के खिलाफ शिकायत दर्ज की, जिसने उसे चंडीगढ़ से नैना देवी कॉम्प्लेक्स में दुर्व्यवहार किया था। अक्टूबर 2018 में, रानी नागर ने दावा किया कि उसका पर्स चोरी हो गया जब वह जम्मू में वैष्णो देवी की यात्रा पर गई थी और जिस गेस्ट हाउस में वह रुकी थी, उसके ठहरने के संबंध में रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की गई थी। दिसंबर 2018 में, उसने एक पोस्ट लिखी थी कि यूटी गेस्ट हाउस में उसके कमरे का दरवाजा खुला पाया गया था जब वह बाहर से लौटी थीं। अपने पोस्ट में उन्होंने बार-बार लिखा है कि उन्हें और उनकी बहन को लगातार जान का खतरा है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में अपील की कि अगर उनके साथ कोई घटना होती है तो उनके मुकदमा संख्या के आधार पर पता लगाया जाए। 

कुछ पक्ष में कुछ विपक्ष में 

रानी नागर के इस्तीफे की पेशकश के बाद कुछ लोग उनके पक्ष में बोल रहे हैं तो कुछ लोग विपक्ष में है। उत्तर प्रदेश में उनके समर्थन में लोगों ने मुहिम चला रखी है और हरियाणा सरकार से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे रानी नागर का चर्चा में आने का नया हथकंडा भी करा रहे हैं। अब रानी नागर को लेकर भी राजनीति शुरू हो गई है।

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raninagar   |  resignation   |  haryana

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