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भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित और मौतों का आंकड़ा कम क्यों ?

कोविड-19 की चपेट में आए दुनिया के कई देशों की तुलना में भारत में इस संक्रमण से काफी कम लोगों की मौत हुई है। ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है । क्या भारत ने जो कदम उठाए हैं वो काफी है कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए या सही समय पर भारत ने ठोस कदम उठा लिए थे जिसके वजह से संक्रमित और मौतों का आंकड़ा और देशो की तुलना में काफी कम है ।

Abhishek Dubey
Abhishek Dubey | 29 Apr, 2020 | 5:51 pm

भारत में कोविड-19 संक्रमण का पहला पॉजिटिव केस दो महीने पहले रिकॉर्ड किया गया था। लेकिन तब से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले इस देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 30,000 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। अब तक इस संक्रमण से यहां तकरीबन 1000 से अधिक मौतें हुई हैं। भारत में कोरोना वायरस से मौतें किस कदर बढ़ रही हैं, इसे समझने के लिए यह देखना होगा ये कितने दिनों में दोगुनी हो रही हैं। भारत में इस वक्त मौतें नौ दिनों में दोगुनी हो रही हैं। 25 अप्रैल तक यहां 825 मौतें हो चुकी थीं, जबकि 16 अप्रैल को ये मौतें लगभग इनकी आधी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत के लिए बेहद राहत की बात है क्योंकि संक्रमण के इस स्टेज में न्यूयॉर्क में दो या तीन दिन में ही मौतों का आंकड़ा दोगुना तक पहुंच जा रहा है

Main
Points
30 जनवरी को केरल में कोविड-19 का पहला केस दर्ज किया गया
भारत में 29 अप्रैल तक 31,332 केस दर्ज किये जा चुके हैं
कोविड-19 से अभी तक हो चुकी हैं 1007 मौंते

लॉकडाउन के वजह से है मौतों में कमी ?

ICMR का कहना है कि भारत में संक्रमण और मौतें अगर काबू में हैं तो इसके पीछे एक महीने से ज्यादा वक्त से चल रहे कड़े लॉकडाउन का रोल हो अहम है। इसके अलावा तमाम राज्यों के मुश्यमंत्रियों को भी मानना हे कि लॉकडाउन की वजह से स्थिति काफी काबू में है वर्ना ये आंकड़ा जो हज़ारों में है लाखों में होता। लेकिन विपक्ष में बैठी कांग्रेस का कहना है कि लॉकडाउन कोरोना वायरस का सामाधान नहीं है ये सिर्फ इस बिमारी को कुछ दिनों के लिए बढ़ने से रोक सकता है खत्म नहीं कर सकता। इसके लिए हमें ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करना ज़रूरी है ताकि संक्रमित लोगों का सही आंकड़ा सामने आ सके ।

क्या भारत में कम टेस्टिंग की वजह से मौतों का आंकड़ा कम?

भारत में अभी तक 770764 सेंपल के टेस्ट हो चुके हैं । देश में सरकारी जांच केंद्रो की संख्या ICMR के अनुसार 288 है जबकि प्राइवेट लैब की संख्या 87 है । कुल मिलाकर भारत की अबादी के अनुसार जांच के आंकड़े ढ़ाई महीने में काफी कम हैं । इसी मुद्दे पर विपक्ष में बैठी कांग्रेस बार बार सवाल उठा रही है । जब जांच कम होंगे तो रिपोर्ट भी कम ही आएंगे । इसके अलावा देश में उन्ही कोविड-19 से हुईं मौतों का आंकड़ा है जो हॉस्पिटल में हुंई हैं। जो मौंते घर पर या और कहीं हुई है उनके आंकड़े नहीं है । इसलिए कोविड 19 से हुई मौतों का सही आंकड़ा सामने नही आ पाया है ।  

भारत में 80 फ़ीसदी मौतें घरों में इसलिए सही आंकड़े में दिक्कत

डॉक्टर्स का कहना है कि भारत में अभी भी 80 फीसदी मौतें घरों में होती हैं। इनमें मलेरिया और न्यूमोनिया जैसी संक्रामक बीमारी से होने वाली मौतें शामिल हैं। प्रसव के दौरान मौत, हार्ट अटैक और दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की रिपोर्टिंग तो अक्सर अस्पतालों से हो जाती है। काफी लोगों को कुछ वक्त तक इलाज मिल भी जाता है। फिर वे लौट जाते हैं और घरों में उनकी मौत हो जाती है। इसलिए सिर्फ अस्पताल से हुई मौतों की गिनती से ही हम यह पता नहीं लगा सकते कि भारत में वास्तव में कोविड-19 से कितने लोगों की मौत हुई है। 

एक तरीका ये भी है कि श्मशान या कब्रों में लाई गई लाशों का हिसाब रख कर मौतों का सही आंकड़ा पता करनापर ये काम भी काफी पेंचीदा और मुश्किल काम है। भारत के गांवों और सुदूर इलाकों के बड़े हिस्से में लाशों का खुले में अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। कोई श्मशान घाट या निर्धारित कब्रिस्तान नहीं होता। भारतीयों की बहुत छोटी आबादी के पास अंतिम संस्कार के लिए खास सुविधा है।

मौतों के सही आंकड़े के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल ?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पब्लिक हेल्थ सिस्टम में मजबूत निगरानी के अभाव में मोबाइल फोन का इस्तेमाल मौतों पर नजर रखने के लिए किया जा सकता है। इन्फ्लुएंजा से होने वाली मौतों के लिए मोबाइल से रिपोर्टिंग की जा सकती है ताकि यह पता किया जा सके कि क्या इन मौतों का संबंध कोविड-19 से था। भारत में 85 करोड़ लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। उन पर इस बात के लिए जोर दिया जा सकता है कि वे अपने गांव में किसी भी असामान्य मौत के बारे में एक टोल-फ्री नंबर पर जानकारी दें। इसके बाद अधिकारी परिवार से संपर्क कर मौत के बारे में मौखिक जानकारी ले सकते हैं। इस तरीके से बिल्कुल सही आंकड़ा तो नहीं आ पाएगा पर बहुत हद तक हम नज़दीक होंगे ।

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Corona pandemic   |  Corona out   |  break   |  India   |  death ratio   |  Corona patient

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