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आरबीआई की मलहम से, जानिए देश के कामगारों को कितना होगा फायदा?


Ankit Mishra
Ankit Mishra | 19 Apr, 2020 | 12:16 pm

जब किसी घर के बुजुर्ग की तबियत खराब होती है और उस बुजुर्ग के इलाज पर सबसे ज्यादा व्यय होना शुरु हो जाता है। उस परिवार की पहली प्राथमिकता बुजुर्ग के स्वास्थ्य को अच्छा करना है। इसलिए परिवार तमाम तरह के खर्चों को रोककर बुजुर्ग के स्वास्थ्य पर होने वाले व्यय पर पूरा ध्यान देता है। लॉकडाउन में करोड़ों की संख्या में देश में रह रहे दिहाड़ी मजदूर, कामगारों और किसानों के लिए आरबीआई ने ध्यान देते हुए बड़े कदम उठाये हैं। 

Main
Points
RBI ने प्रमुख भारतीय वित्तीय सेवा संस्थानों के लिए वित्तीय पैकेज का किया एलान
नाबार्ड, सिडबी और एनएचबी को दिए 50 हजार करोड़
आरबीआई यह शुरुआती सहायता राशि वर्तमान रेपो रेट (4.4%) पर देगी

कोरोना की वजह से इस समय देश को दो मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड़ रही है। भारत में लॉकडाउन की वजह से उत्पादन समेत अधिकतम आर्थिक गतिविधियां बंद है। अब ऐसे में सरकार पर अर्थव्यवस्था को लेकर भारी दबाव बना हुआ है।

46 करोड़ लोग करते हैं अर्थव्यवस्था को चलाने में मदद

आर्थिक दृष्टिकोण से इस महामारी से भारत पर सबसे ज्यादा प्रभावित होने के आसार हैं। इसकी वजह है भारत के कामगारों के कार्य क्षेत्र की संरचना। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि भारत सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली संगठन राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (National Sample Survey Organization (NSSO)  के 2017 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत के 46.5 करोड़ लोग देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं जिनमें 21.4 करोड़ स्व-नियोजित व्यवसाय या रोजगार से हैं। इसमें एक बड़ी संख्या किसानों की है।

इनके अलावा बचे लगभग 25 करोड़ रोजगार में से 3 करोड़ सरकारी और 1.9 करोड़ प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं। देश में रोजगार सृजन के लिए कृषि के बाद सबसे बड़ा माध्यम इनफॉर्मल सेक्टर है। इस माध्यम से 18 करोड़ लोगों का परिवार चलता है, यह वह लोग है जिनकी जीविका दैनिक भत्ते से चलती है, चूंकि देश में आर्थिक गतिविधियां बंद हैं इसलिए सबसे ज्यादा खामियाजा भी इन्हें ही भुगतना पड़ेगा।

भारत सरकार के आर्थिक पैकेज के बाद आरबीआई गवर्नर ने प्रमुख भारतीय वित्तीय सेवा संस्थानों के लिए वित्तीय पैकेज का ऐलान किया। इस पैकेज के केंद्र में ग्रामीण क्षेत्रों और मध्यम एवं लघु उद्योग में काम करने वाले कामगार रहे हैं। आरबीआई गवर्नर के इस ऐलान से ग्रामीण और इनफॉर्मल सेक्टर में काम करने वाले लोगों को कोरोना से इस लंबी लड़ाई में कुछ राहत मिलने की संभावना है।

50 हजार करोड़ का पैकेज देश की प्रमुख वित्तीय संस्थान - नाबार्ड, सिडबी और एनएचबी को दिया गया है। आरबीआई गवर्नर के अनुसार यह शुरुआती सहायता राशि वर्तमान रेपो रेट (4.4%) पर दी जाएगी। इसके बाद स्थिति का जायजा लेने के बाद जरूरत पड़ने पर और भी सहायता प्रदान की जाएगी। इस पैकेज के जरिये बाजार में नकद प्रवाह बनाये रखने का प्रयास किया जा रहा है।

नाबार्ड (NABARD)

नाबार्ड कृषि और ग्रामीण विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराने वाला संस्थान है। नाबार्ड राज्य सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक समेत ग्रामीण क्षेत्रों में विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु कार्य कर रही वित्तीय संस्थानों के लिए वित्तपोषक की भूमिका निभाता है। इस पैकेज के तहत नाबार्ड को 25 हजार करोड़ की राशि मिली है जिससे वह किसानों, पशुपालन संबंधी व्यवसाय से जुड़े लोगों समेत तमाम छोटे व्यवसायों को ऋण उपलब्ध करा इस संकट की घड़ी से उबारने में सहायता कर सकता है।

सिडबी (SIDBI)

सिडबी के हिस्से इस पैकेज में 15 हजार करोड़ आये हैं। यह लघु और लघुतर उद्योग की स्थापना, वित्त पोषण और विकास के लिए वित्तीय सहायता देने का कार्य करती है। यह लघु उद्योग को सीधा ऋण न देकर व्यापारिक बैंकों, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा राज्य औद्योगिक वित्त निगमों के जरिये सहायता प्रदान करता है। सिडबी को मिले इस पैकेज की सहायता से MSME उद्योग के उत्थान में फायदा मिलेगा जिससे भारत का एक बड़ा तबका प्रभावित होगा। 

सिडबी को मिलने वाला यह पैकेज इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि देश के लगभग 11 करोड़ से ज्यादा लोग MSME सेक्टर में कार्यरत हैं। MSME देश की जीडीपी में 29 प्रतिशत का योगदान करता है।

NHB 

राष्ट्रीय आवासीय बैंक का कार्य देश के सभी वर्गों को एक किफायती दर पर आवासीय लोन उपलब्ध कराना है। एनएचबी को इस पैकेज से मिले 10 हजार करोड़ की सहायता से निम्न और मध्य स्तर के निर्माण कार्यों को निर्बाध रूप से चलाये रखने में मदद मिलेगी। निर्माण कार्य के निर्बाध रूप से चलने का फायदा असंगठित क्षेत्रों में कार्य कर रहे मज़दूरों व निर्माण कार्यों से जुड़े व्यवसायों और कामगारों को मिलेगा।

भारतीय रिज़र्व बैंक की तरफ से दी गई मदद इन क्षेत्रों के लिए संजीवनी का काम करेगी। इस सहायता से अप्रत्यक्ष रूप से देश के निचले तबके के कामगार को जीविका चलाने में मदद मिलने के आसार हैं।

Tags:
Corona   |  RBI   |  Shashikant Das   |  NABARD   |  SIDBI   |  NHB

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