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कुत्तों से फैला कोरोना, वायरस का रहस्य और गहराया!

दुनियाभर में कोरोना वायरस पर रोक के लिए शोध लगातार जारी है। ओटावा यूनिवर्सिटी के बायोलॉजी प्रोफेसर जुहुआ जिया ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके शोध के मुताबिक कुत्तों से इंसानों तक कोरोना का संक्रमण फैला। एनालिसिस मॉलीक्यूलर बायोलॉजी एंड एवोल्यूशन के अपने अध्ययन में उन्होंने इस बात की आशंका जताई है।

Suyash Tripathi
Suyash Tripathi | 16 Apr, 2020 | 1:34 pm

कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है, विश्वभर में अब तक 20 लाख से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं तो वहीं मौतों का आंकड़ा 1 लाख को पार कर चुका है। लगातार दुनियाभर के शोधकर्ता और मेडिकल टीमें कोरोना का तोड़ खोजने में लगी हैं, लेकिन विडम्बना यह है कि अभी तक इस बात का भी पुख्ता सबूत नहीं मिल पाया है कि ये महामारी इंसानों तक कैसे पहुंची? अभी तक के शोध में यह तो स्पष्ट हो गया है कि यह चमगादड़ों से अन्य जानवरों में पहुंचा और वहां से इसका संक्रमण मनुष्यों तक। हाल ही में कनाडा के ओटावा यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी प्रोफेसर जुहुआ जिया ने अपने अध्ययन में बताया है कि कोरोना चमगादड़ों से होते हुए कुत्तों तक पहुंचा और वहां से इसका संक्रमण इंसानों तक। उन्होंने अपने एनालिसिस मॉलीक्यूलर बायोलॉजी एंड एवोल्यूशन में इस बात के संकेत दिए हैं।

Main
Points
कोरोना संक्रमण के इंसानों तक पहुंचने की आई नई थ्योरी
कुत्तों से होते हुए इंसानों तक पहुंचा कोरोना वायरस
कनाडा के ओटावा यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी प्रोफेसर जुहुआ जिया ने शोध में जताई आशंका
जिंक फिंगर एंटीवायरल प्रोटीन जैप (ZAP) पर कोरोना करता है अटैक
शोधकर्ताओं का दावा दोबारा लौट सकता है कोरोना वायरस

चमगादड़,पैंगोलिन के बाद कुत्तों तक फैला

फरवरी में हुई एक प्रारंभिक स्टडी में वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि SARS-CoV-2 यानी कोविड-19 चमगादड़ों से होते हुए चीटीं खाने वाले जीव पैंगोलिन में आया। इसके बाद पैंगोलिन से इंसानों में प्रवेश कर गया। इस थ्योरी से कुछ वैज्ञानिक असहमत भी थे। हालिया शोध में कनाडा के ओटावा यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी प्रोफेसर जुहुआ जिया ने इस बात के संकेत दिए हैं कि कुत्तों के जरिए यह बीमारी इंसानों तक संक्रमित हुई हैं। प्रो.जिया ने अपने एनालिसिस में इस बात की पुष्टी की है कि कोरोना वायरस चमगादड़ों से निकलकर कुत्तों से होते हुए इंसानों में पहुंचा है। जिया ने अपने विश्लेषण में बताया है कि इंसानों के शरीर में एक प्रोटीन होता है जिसे जिंक फिंगर एंटीवायरल प्रोटीन जैप (ZAP) कहते हैं । जैप जैसे ही कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड साइट CpG को देखता है, उसपर हमला कर देता है, यहीं पर वायरस अपना काम शुरू करता है और वह इंसान के शरीर में मौजूद कमजोर कोशिकाओं को खोजता है। जिया ने जेनेटिक कोड साइट, साइटोसिन-गुआनिन (CpG), ZAP समेत कई जेनेटिकल मॉलीक्यूल्स का अध्ययन किया है। उसी के आधार पर उन्होंने बताया है कि कुत्तों में जैप कमजोर होता है, वह कोरोना वायरस के सीपीजी साइट से लड़ नहीं सकता, कुत्ते की आंतों में यह वायरस अपना घर बना लेता है और फिर कुत्ते के जरिए यह इंसानों में पहुंच जाता है।

वायरस के संक्रमण का रहस्य गहराया!

कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर अभी कई रहस्य अनसुलझे  हैं जिसकी वजह से बहुत लंबे वक्त के लिए इसकी सटीक भविष्यवाणी कर पाना मुश्किल है।शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि इस वायरस का तोड़ खोजने में अभी काफी वक्त लग सकता है इसलिए लोगों को अपने रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की जरुरत है यदि लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्थायी हो जाती है तो कोरोना वायरस पांच सालों या उससे ज्यादा लंबे समय के लिए गायब हो सकता है। अगर लोगों की इम्युनिटी सिर्फ एक साल तक कायम रहती है तो बाकी कोरोना वायरसों की तरह सालाना तौर पर इस महामारी की वापसी हो सकती है।

एम्यून सिस्टम ही बचा सकता है संक्रमण

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में महामारी विशेषज्ञ और स्टडी के लेखक मार्क लिपसिच ने अपने शोध में कहा है कि “संक्रमण दो चीजें होने पर फैलता है- एक संक्रमित व्यक्ति और दूसरा कमजोर इम्यून वाले लोग। जब तक कि दुनिया की ज्यादातर आबादी में वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो जाती है, तब तक बड़ी आबादी के इसके चपेट में आने की आशंका बनी रहेगी। यदि ऐसा होता है तो पूरी दुनियां को लंबे वक्त तक लॉकडाउन जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

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