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जानिए कोरोना के कारण आपको कितने महीने नहीं देनी पड़ेगी बैंक की EMI


Parliamentary Business Team
Parliamentary Business Team | 27 Mar, 2020 | 12:00 am

कोरोना वायरस के चलते देश भर में लॉकडाउन की स्थिति में अगर आप अपनी कार, घर या किसी दूसरे क़र्जे के भुगतान के लिए परेशान हैं तो भारतीय रिज़र्व बैंक से आपके लिए बड़ी ख़बर आयी है। आर.बी.आई ने देश के सभी बैंकों को सलाह जारी करते हुए तीन महीने तक क़र्ज़ की ईएमआई न लेने को कहा है। साथ ही आर.बी.आई ने रिपो रेट में कटौती करके लोन को और सस्ता कर दिया है। हालाँकि आर.बी.आई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की सलाह पर आर.बी.आई ने देश में अगले कुछ समय बाद मंदी की आशंका जताई है। कोरोना वायरस के चलते दुनिया भर में लॉकडाउन और व्यावसायिक गतिविधियों के बंद होने के चलते भारत की जीडीपी पर इसका असर पड़ने की चिंता भी आर.बी.आई ने जताई है। इससे पहले सरकार ने कोरोना वायरस के प्रभाव से निपटने के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपया के पैकेज की भी घोषणा की थी। 

Main
Points
घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षा देना समय की मांग
रेपो रेट 5.15 फीसदी से घटकर 4.45 फीसदी
रिवर्स रेपो रेट में भी 0.90 फीसदी की कटौती

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की प्रमुख बातें-

* रेपो रेट में 75 आधार अंकों की कटौती। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के छह में से चार सदस्यों ने रेट कट के पक्ष में वोट किया। 

* रेपो रेट 5.15 फीसदी से घटकर 4.45 फीसदी हो गई है। इससे सभी तरह के कर्ज सस्ते होंगे।

* इसके अतिरिक्त आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में भी 0.90 फीसदी की कटौती की है। अब यह 4.90 फीसदी से घटकर चार फीसदी हो गई है। 

* कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। इसका असर कितना होगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता। लेकिन कच्चे तेल की कीमतें घटने से कुछ राहत मिलेगी।

* आर.बी.आई गवर्नर ने कहा कि कच्चे तेल के दाम और मांग में कमी से कोर (मुख्य) मुद्रास्फीति कम होगी। 

* आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोविड-19 के चलते अर्थव्यवस्था को होने वाले खतरे को देखते हुए एमपीसी ने समय से पहले ही समीक्षा बैठक की। समीक्षा बैठक 24 से 27 मार्च तक चली। 

* दास ने कहा है कि उनका ध्यान आर्थिक स्थिरता पर है और विश्व के कई देश कोरोना वायरस की महामारी से लड़ रहे हैं। देश में लॉकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियां ठप हैं। इसलिए आरबीआई का ध्यान लोगों को राहत देने में हैं। 

* आरबीआई ने सभी बैंकों को सलाह दी है कि वो ग्राहकों से तीन महीने के लिए ईएमआई को लेने के लिए टाल दें। 

* आरबीआई ने सभी बैंकों का कैश रिजर्व रेश्यो भी एक फीसदी यानी 100 आधार अंक घटाकर तीन फीसदी कर दिया है। यह पूरे एक साल के लिए चार फीसदी की बजाए तीन फीसदी होगा। इसके तहत बैंक अपनी जमा का कुछ फीसदी आरबीआई के पास रखते हैं। इसमें कटौती होने से 1.37 लाख करोड़ रुपये की रकम बैंकों को मिल पाएगी।

* इसके अतिरिक्त लिक्विडिटी एड्जेस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) में भी 0.9 फीसदी की कटौती की घोषणा की गई है। अब एलएएफ घटकर चार फीसदी हो गया है।

कोरोना वायरस की वजह से पहले हुई MPC की मीटिंग

रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने कहा है कि मौजूदा समय जैसी अस्थिरता कभी नहीं देखी गई है. कोरोना वायरस की वजह से आउटलुक अनिश्चित और निगेटिव है. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से मांग में काफी कमी आई है। घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षा देना समय की मांग है. कोरोना वायरस की वजह से मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मौद्रिक नीति की बैठक (MPC) ने पहले बैठक की है।उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिरता के लिए सेंट्रल बैंक ने यह कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सभी टर्म लोन के लिए 3 महीने का Moratorium लागू किया गया है. नेट फंडिंग नियम को 6 महीने के लिए टाल दिया गया है. उन्होंने कहा कि क्रेडिट फ्लो बनाए रखने के लिए RBI ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. लिक्विडिटी के लिए 1 लाख करोड़ रुपये तक के LTRO करने का फैसला लिया गया है।

गुरुवार को वित्त मंत्री ने 1.70 लाख करोड़ के राहत पैकेज का किया था ऐलान

बता दें कि गुरुवार को सरकार ने गरीबों के लिए 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया है।वित्‍त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत इस राहत पैकेज की घोषणा की है।

फरवरी की क्रेडिट पॉलिसी में स्थिर रखी गई थीं ब्याज दरें

गौरतलब है कि फरवरी की क्रेडिट पॉलिसी (Credit Monetary Policy) में रिजर्व बैंक (Reserve Bank) ने नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। आरबीआई (RBI) ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था। मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सभी 6 सदस्य ब्याज दरों में बदलाव करने के पक्ष में नहीं थे। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 5.15, रिवर्स रेपो रेट 4.90 फीसदी, एमएसएफआर 5.40 फीसदी और बैंक रेट 5.40 फीसदी के स्तर पर बरकरार रखा था। RBI ने CRR 4 फीसदी और SLR 18.5 फीसदी पर बनाए रखने की घोषणा की थी।

क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट

रेपो रेट (Repo Rate) वह दर होती है जिस दर पर रिजर्व बैंक (RBI) दूसरे व्यवसायिक बैंक को कर्ज देता है। व्यवसायिक बैंक रिजर्व बैंक से कर्ज लेकर अपने ग्राहकों को लोन ऑफर करते हैं। रेपो रेट कम होने से आपके लिए लोन की दरें भी कम होती हैं। वहीं रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को रिजर्व बैंक में जमा उनकी पूंजी पर ब्याज मिलता है।

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