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कोविड-19 के दौरान संघ प्रमुख भागवत की स्वदेशी अपील

आरएसएस प्रमुख ने कोरोना के वक्त विदेशी उत्पादों पर निर्भरता छोड़ स्वदेशी अपनाने पर दिया ज़ोर, लोगों से धैर्य, धार्मिक- सौहार्द, सहयोग की भावना रखने की भी अपील की

Archna Jha
Archna Jha | 27 Apr, 2020 | 10:07 am

कोविड-19 महामारी के मुद्दे पर रविवार शाम राष्ट्रीय सेवा संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने वर्चुअल प्लेटफार्म के ज़रिये बातचीत के दौरान भारत में कोरोना संकट को अवसर बनाकर क्वालिटी वाले स्वदेशी उत्पादों को बनाने पर ज़ोर देते हुए कहा कि-“हम सभी स्वदेशी का आचरण अपनाते हुए, यहां की बनी वस्तुओं को उपयोग करेंगें और ऐसे में उत्पादकों और कारीगरों को यह सोचना ही होगा, कि भारतीय उत्पाद किसी भी दर्ज़े से क्वालिटी में 19 न हों, कोरोना की स्थिति में विदेशी सामानों पर निर्भरता हमकों छोड़नी ही होगी, वर्तमान में हम खुद को इतना सशक्त करें कि केवल भारतीय वस्तुओं का उपयोग करें, अगर उसके बिना जीवन नही चलता है, तो उसे अपनी शर्तों पर चलाने की ठान लें।”

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Points
कोरोना महामारी में विदेशी उत्पादों से निर्भता कम करे जनता: मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख
देश मे बनाये उत्पाद क्वालिटी के मामले में कम न हों: मोहन भागवत
कोरोना की रोकथाम के लिए लॉकडाउन का होना बेहद ज़रुरी, हटते ही जमा हो सकती है भीड़: मोहन भागवत
धार्मिक भेदभाव को हथियार बनाने से बचें लोग: मोहन भागवत
वर्तमान में अबंडकर के नियम-कानूनों के पालन की आवश्यकता: मोहन भागवत

भागवत के संबोधन की मुख्य बातें क्या रहीं

लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि-“कितने दिन हैं यह न सोचते हुए और आलस्य को खत्म करते हुए, दिलचस्पी के साथ लगातार काम करते रहना है। कोरोना के चलते लोगों मे यह डर बैठ गया है कि उनकों क्वारैंटाइन में डाल देगें, नियमों में बांध देगें, ऐसी स्थिति में बहुत लोग भड़काने को भी हैं जिससे गलत कामों को और बढ़ावा मिलता है, पर लोग सरकार पर भरोसा रखें कि ऐसा कुछ नही होगा। हाथ धोना, मास्क पहनना, दवा लेना जैसी सावधानियाँ बरतना बेहद ज़रुरी है, लोग इस बात का ध्यान रखें कि जहां अनुशासन है, वहां कोरोना रुका है और जहां अनुशासन नही वो जगह चौपट हुईं है।”

कोरोना महामारी के दौरान भागवत ने लोगों से धार्मिक भेदभाव को हथियार न बनाने की बात कही

भागवत ने कहा- “ इन परिस्थितियों मे धार्मिक भेदभाव को खत्म करते हुए यह ध्यान रखना होगा कि सब अपने हैं। सेवाभाव के दौरान कोई प्रतिस्पर्धा या भेद न हो। हमारी सेवा का आधार अपनापन, स्नेह, प्रेम, संवाद, समरसता और समझदारी होनी चाहिए।”  हाल ही में दो सन्यासियों की हुई माब लिचिंग और तब्लीगी जमात  का ज़िक्र करते हुए भागवत बोले –“ ऐसी किसी घटना के होने पर हमे प्रतिक्रिया न देते हुए अपने क्रोध और भय को वश में रखना है और न ही कुछ लोगों की गलती की वजह से पूरे समुदाय पर आरोप लगाना है। इस घटना को लेकर लोगों और मीडिया में जो बयानबाज़ी चल रही है, ऐसा करना गलत है, हमें कानून को अपने हाथ में नही लेना है, कोरोना संकट के बीच हमें भेदभाव और स्वार्थहीन होकर सकारात्मक बनना होगा।”

कोरोना के चलते लॉकडाउन पर अपने विचार रखते हुए भागवत बोले

“वर्तमान हालातों के चलते लोग परेशान हैं, हमें पता है लेकिन, लॉकडाउन की आवश्यकता ज़्यादा वक्त के लिए नही रहेगी, यह बीमारी ज़रुर जाएगी। लेकिन जो अस्त-व्यस्त हुआ है वह ठीक होने में वक्त लेगा, क्योकिं कई जगह पर लॉकडाउन में छूट मिलने पर भीड़ जमा हो गई और कोरोना संक्रमण का डर अधिक हो गया ऐसे में जब दुकानें, स्कूल, बाज़ार, फैक्ट्री शुरु होगें तो भीड़ जमा होगी, यह सब सोचते हुए भी लॉकडाउन ज़रुरी है”

डॉक्टर अंबेडकर के नियम-कानूनों के पालन पर पर ज़ोर देते हुए भागवत ने कहा- “  इस संकट से निकलने के बाद विश्व में हमारी भूमिका एक नए भारत का उत्थान करने के रुप में होनी चाहिए” बता दें कि शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट के ज़रिये मोहन भागवत के इन विचारों की सराहना करते हुए कहा कि-“ भागवत जी ने जो मार्गदर्शन दिया, उससे न केवल समाज चलाने वालों को एक नई दिशा और गति मिली है, बल्कि उन्होने अपने सभी 130 करोड़ भारतवासियों को बिना किसी भेदभाव के सेवा करने का संदेश दिया है।”

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Covid-19   |  RSS   |  mohan bhagwat   |  virtualplate   |  form   |  indigenous   |  product

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