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बस्तीः सांसद के बड़े दावे, जनता ने की शिकायत
बस्तीः सांसद के बड़े दावे, जनता ने की शिकायत
08 Sep 2020  |  08:15 PM
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले को खासतौर से कपड़ा उद्योग और चीनी मिलों के लिए जाना जाता था। बताया जाता है कि रामायणकालीन महर्षि वशिष्ठ का आश्रम इसी क्षेत्र में होने की वजह से इसका प्राचीन नाम वैशिष्ठी था जिसे बाद में राजा कल्हण ने बदलकर बस्ती कर दिया था। बस्ती को हिंदी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान और आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल के जन्मस्थान के रूप में भी जाना-पहचाना जाता है। इसी जिले के अगोना गांव में उनका जन्म हुआ था। क्षेत्रफल की दृष्टि से बस्ती उत्तर प्रदेश का 7वां सबसे बड़ा जिला है। राजनीतिक रूप से कम चर्चित बस्ती लोकसभा सीट पर फिलहाल बीजेपी का दबदबा दिखता है। इस लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभाएं हैं, हर्रैया, महादेवा, बस्ती सदर, कप्तानगंज और रुधौली। पांचों विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है।इतना ही नहीं क्षेत्र के सांसद हरीश द्विवेदी भी बीजेपी के ही नेता हैं। बस्ती सदर लोकसभा से राम गरीब पहले सांसद थे।
दिल्ली में बैठकर पीलीभीत संसदीय क्षेत्र की सेवा करते हैं दूसरी बार सांसद बने वरुण गांधी
दिल्ली में बैठकर पीलीभीत संसदीय क्षेत्र की सेवा करते हैं दूसरी बार सांसद बने वरुण गांधी
21 Aug 2020  |  12:59 PM
उत्तर प्रदेश की पीलीभीत लोकसभा सीट से बीजेपी के युवा नेता वरुण गांधी सांसद हैं। 2019 में वह यहां से दूसरी बार सांसद बने हैं। इसके पहले उनकी मां मेनका गांधी यहां से सांसद थीं। 2009 में वरुण यहां से पहली बार सासंद चुने गए थे। जिस प्रकार इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए अमेठी और रायबरेली को परंपरागत संसदीय सीट माना जाता है, उसी प्रकार कहा जा सकता है कि पीलीभीत भी गांधी परिवार के इस दूसरे हिस्से यानी मेनका गांधी और वरुण गांधी के लिए परंपरागत सीट ही है। कभी मां तो कभी बेटा इस सीट से सांसद चुनकर लोकसभा में पहुंचते रहे हैं। यह तो बात हुई सीट के बारे में। अब बात करते हैं सांसद औऱ उनकी क्षेत्र में सक्रियता व कामकाज के बारे में। पार्लियामेंट्री बिजनेस ने पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी के बारे में तफ्सील से पड़ताल की तो यह सामने आया कि सांसद जी क्षेत्र के विकास की बात तो करते हैं, लेकिन यहां आते कम ही हैं। कोरोना महामारी की वजह से क्षेत्र में आना और भी कम हो गया है। वह दिल्ली में ही परिवार के संग रहते हैं। वहीं से डिजिटल माध्यम से क्षेत्र के लोगों और अधिकारियों से जुड़े रहते हैं और कामकाज कराते रहते हैं। हालांकि जनता को उनसे न मिल पाने की शिकायत है। कारोबारी भी शिकायती टोन में ही बात करते दिखे। पीलीभीत चावल और बांसुरी उद्योग के लिए विख्यात है। इन दोनों ही क्षेत्रों के उद्यमियों ने सांसद जी की नामौजूदगी की शिकायत की। आइए देखें कैसा है पीलीभीत के सांसद जी का रिपोर्ट कार्डः
फिल्मों में हिट, संसद में एक्टिव, फिर क्षेत्र से क्यों नदारद रहते हैं रविकिशन
फिल्मों में हिट, संसद में एक्टिव, फिर क्षेत्र से क्यों नदारद रहते हैं रविकिशन
31 Jul 2020  |  05:43 PM
वादा तेरा वादा,वादे पे तेरे मैं मारा गया,बन्दा ये सीधा साधा,वादा तेरा वादा,ये लोकप्रिय संगीत आपको जरूर याद होगा इस कोरोना काल मे गोरखपुर की जनता भी अपने सांसद महोदय के द्वारा किये हुए वादे को याद कर रही है और अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रही है क्योंकि चुनाव के समय सांसद महोदय ने लोगो से बहूत से वादे किए थे सांसद महोदय का सबसे पहला वादा था वो गोरखपुर में रहेंगे यहीं आवास लें लेंगे लेकिन उनका यह वादा बेमानी साबित हो रहा है इस वैश्विक महामारी से जहाँ पूरा देश त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है वही गोरखपुर में भी कोरोना का संकट काफी गहरा गया है लोगो के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है, गरीब गुरबा जो दो वक्त के खाने का इंतेज़ाम ठेला खुमचा लगाकर करते थे उनका भी रोजगार बन्द सा हो गया है।ऐसे में गोरखपुर की जनता अपने सांसद को पुकार रही है कहाँ है सांसद प्यारे।
अकबरपुर-44 लोकसभा क्षेत्र में जनता के बीच नहीं पहुंचे सांसद देवेंद्र सिंह भोले
अकबरपुर-44 लोकसभा क्षेत्र में जनता के बीच नहीं पहुंचे सांसद देवेंद्र सिंह भोले
26 Jun 2020  |  05:49 PM
पार्लियामेंट्री बिजनेस की टीम निकली है उन वोटरों के बीच जिन्होंने अकबरपुर 44 लोकसभा के सांसद देवेंद्र सिंह (भोले ) को सांसद बनाया और हिंदुस्तान की सबसे बड़ी पंचायत में बिठाया ताकि उन जैसे गरीब और मजबूर लोगों की मदद हो सके। उनकी पीड़ा में मरहम लग सके। क्षेत्र की जनता ने  अपना हाल बयान करते हुए बताया कि पूरे लॉक डाउन के समय से हमारे क्षेत्र के सांसद हमें जिले में नहीं दिखे हैं और दिखे भी हैं तो पार्टी के काम करते दिखे थे। बात की जाए कि जिस जनपद में लाक डाउन भर यहां के लोग तो परेशान थे ही, साथ ही हजारों की संख्या में दूसरे राज्यों से भी प्रवासी मजदूर अब अपने गांव पहुँच रहे थे, उनके खाने पीने और रोजगार की कोई ऐसी बात सांसद की तरफ से नहीं की गई जो इस वैश्विक महामारी के यानि कोरोना काल में उनको मदद का भरोसा दे सके। ये आम लोग बताते हैं कि हम इस कोरोना काल में अधिकारियों से अपनी बात बताकर मदद मांगते हैं। हम निराश होकर अपने सांसद को कोस रहे थे कि आखिर इतनी बड़ी भूल जो हम लोगों ने की, उसकी पुनरावृत्ति अब न होगी।

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