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कोरोना में है दो स्ट्रेन एल स्ट्रेन बना मौत की वजह


Alisha
Alisha | 30 Apr, 2020 | 11:59 am

देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का आंकड़ा मानों थमने का नाम ही नहीं ले रहा है| इस कोरोना वायरस के चलते पिछले कुछ दिनों से गुजरात में कोरोना से होने वाली मौत की ख़बर भी ज़्यादा सामने आ रहीं है| अगर बात आंकड़ों की करें तो,गुजरात में संक्रमित लोगों का आंकड़ा 3,774 पहुंच गया है , जब की मरने वालों की संख्या 181 के करीब पहुंच चुकी है| हालांकि गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) के एक वैज्ञानिक का कहना है कि, जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए इस्तेमाल किए गए कोरोना वायरस सैंपल में एक वैज्ञानिक को एल टाइप स्ट्रेन मिला है| जो शायद ज़्यादा मौत होने की वज़ह बन कर सामने आ रहा है|

Main
Points
वैज्ञानिकों को कोरोना में मिले दो तरह के स्ट्रेन
एल टाइप स्ट्रेन को बताया ज़्यादा घातक
अमेरिका चीन और यूरोप में पाया गया एल टाइप इसलिए हो रहीं हैं वहां ज़्यादा मौत
इंदौर के कॉलेज डीन का कहना पुष्टि के लिए भेजेंगे एल टाइप स्ट्रेन
केरल में पाया गया एस टाइप स्ट्रेन इसलिए मौत का आंकड़ा रहा कम|

क्या कहना है रिसर्च सेंटर का?

जीबीआरसी के डायरेक्टर सीजी जोशी का कहना है कि , विदेशी वैज्ञानिकों का ये मानना है ,जहां भी अब तक कोरोना वायरस के कारण सबसे ज़्यादा मौत का आंकड़ा मिला है तो वहां पर ज़्यादातर एल टाइप स्ट्रेन ही पाया गया है| वुहान में भी यही स्ट्रेन ज़्यादा घातक साबित हुआ है| वैज्ञानिकों ने बताया की उन्होंने जीनोम सीक्वेंस के लिए कोरोना के मरीज़ों के सैंपल लिए थे, जिनमे उनको दो तरह के स्ट्रेन मिले पहला एल टाइप और दूसरा एस टाइप| तो वहीं दूसरी तरफ इंदौर के एमजीएम कॉलेज की डीन ज्योति बिंदल का कहना है कि, हम नमूने जाँच के लिए पुणे भेजेंगे, ताकि एल स्ट्रेन की पुष्टि की जा सके|

एल स्ट्रेन और एस स्ट्रेन में अंतर

बात करें एस टाइप स्ट्रेन की तो इसका वायरस एल टाइप के म्युटेशन से ही बना है, लेकिन एस टाइप स्ट्रेन कम घातक साबित हुआ है| दरअसल केरल में कोरोना से संक्रमित मरीज़ सबसे पहले दुबई से आए थे, और दुबई में एस स्ट्रेन है, इसी वजह से केरल में कम जाने गई हैं|  अब बात गुजरात की करें तो, गुजरात में अमेरिका से आने वाले लोगों की संख्या अधिक थी, जहां पर एल स्ट्रेन है और इसी वजह से गुजरात में मौत का आंकड़ा बढ़ता हुआ नज़र आ रहा है| विशेषज्ञों ने ये भी साफ़ कर दिया है कि एल स्ट्रेन और एस स्ट्रेन में ज़्यादा फर्क़ नहीं समझा जा सकता है, दोनों ही अपनी जगह घातक है| ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी हो तो उसके लिए एस स्ट्रेन भी घातक साबित हो सकता है|

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Corona Virus   |  scientist   |   L type   |  strain   |  S type   |  strain   |   gujarat   |   sample   |  danger   |  death

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