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बुजुर्गों के लिए ही क्यों सबसे ज्यादा घातक है कोरोना!


Manmeet Singh
Manmeet Singh | 09 Apr, 2020 | 7:20 pm

दुनिया के वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये एक बड़ी संकट की घड़ी है। महामारी का रूप ले चुके कोरोनावायरस ने समाज में हर वर्ग को प्रभावित किया है लेकिन सबसे ज्यादा मौतें बुजुर्गों की हुई हैं। ऐसे में दुनिया में मौजूद तमाम वृद्ध आश्रमों के लिए चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं। फ्रांस के वृद्धाश्रमों में भी हजारों वरिष्ठ नागरिकों की मौत की खबरें सामने आई हैं।

Main
Points
वरिष्ठ नागरिकों की हुई कोरोना से सबसे ज्यादा मौत
वृद्ध आश्रमों पर भी बड़ा खतरा
सरकार को त्वरित उठाने चाहिए कदम
इटली, चीन ,अमेरिका जैसे देश हैं अत्यधिक प्रभावित

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में 60% लोगों की औसत उम्र 60 या उससे ज्यादा रही है।  सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अध्ययन के मुताबिक कोरोना वायरस के संक्रमण का ज्यादा खतरा वरिष्ठ नागरिकों को है। इसकी जद में उन लोगों के आने के ज्यादा संभावनाएं हैं जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं।

कोरोना के शिकार क्यों बन रहे हैं वरिष्ठ नागरिक

वायरस और बैक्टीरिया हमारी प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करते हैं। इंसान का रक्त तीन चीजों से मिलकर बना है- लाल रक्त कोशिका, सफेद रक्त कोशिका और प्लाज्मा।

बीमारियों से लड़ने और हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम सफेद रक्त कोशिकाएं करती हैं। बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं का निर्माण कम हो जाता है जिसकी वजह से किसी भी नई बीमारी से संक्रमित होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। संक्रमित होने पर हमारा शरीर उससे लड़ नहीं पाता है जिस वजह से मौत हो जाती है।

कैसी है तैयारी?

दिल्ली में साईं सहारा नाम से वृद्ध आश्रम संचालित कर रही डॉक्टर राजेश्वरी बताती हैं-" एहतियातन हमनें शुरुआत से ही कदम उठाने शुरू कर दिए थे । सभी वरिष्ठ नागरिकों को क्वॉरेंटाइन कर रखा है। बाहर से आ रहे किसी भी व्यक्ति को उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी जाती है। बाहर से कोई भी आगंतुक को वृद्धा आश्रम के अंदर नहीं जाने दिया जाता।"

स्वच्छता का इंतज़ाम

कोरोना वायरस अभी तक कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में साफ-सफाई और सामाजिक दूरी ही इससे बचने का एक कारगर उपाय है।  डॉक्टर राजेश्वरी ने बताया कि हम खाने-पीने की सभी चीजों को इस्तेमाल करने से पहले गर्म पानी से धोते हैं। उनके बिस्तर को नियमित रूप से साफ किया जाता है और हर 2 घंटे में उनके हाथ को साबुन या सेनेटाइजर से अच्छी तरह धुलवाया जाता है।

वहीं गुरुग्राम में दूसरी पारी खेल रहे 50 लोगों के साथ रह रहे सीताराम बताते हैं की हर एक वरिष्ठ नागरिक के कक्ष में सैनिटाइजर रखा गया है। उन्हें बाहर नहीं जाने दिया जाता और बाहर से आए किसी भी खाद्य पदार्थ को वह अपनी निगरानी में अच्छी तरह साफ करवाते हैं।

खाद्य पदार्थ एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था

इस वक्त भारत सहित दुनिया के तमाम हिस्सों में मूलभूत सामग्रियों की आपूर्ति में दिक्कतें सामने आ रही हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए समय पर खाना-पीना बेहद अहम हो जाता है। डॉक्टर राजेश्वरी ने बताया कि उनके साथ ज़्यादातर मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीज हैं जिस वजह से उन्होंने पर्याप्त मात्रा में अनाज और जरूरत की दवाइयों का भंडारण कर रखा है। समय-समय पर उन्हें विटामिन सी, आयरन की गोलियां भी दी जाती हैं। हालांकि अकस्मात उपजी चिकित्सीय परिस्थिति में थोड़ी परेशानी होती है। चिकित्सक की उपलब्धता में दिक्कत होती है। सीताराम का कहना था कि उनके वृद्ध आश्रम में ही चिकित्सक मौजूद हैं।

घर वालों से संपर्क

सीताराम ने बताया कि यदि किसी को भी घर की याद आती है या मिलने का मन होता है तो उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए घर के सदस्य से बात करवा दी जाती है।

डॉक्टर राजेश्वरी के संग ज्यादातर विधवा और तलाकशुदा वृद्धजन रहते हैं। उनके मुताबिक घरवालों ने उनकी तनिक भी सुध नहीं ली है और न ही यह लोग घर वालों से बात करने या उनसे मिलने के इच्छुक हैं। उन्हें व्यस्त रखने के लिए मनोरंजन के तमाम साधन उपलब्ध हैं।

क्या है परेशानियां

वृद्धावस्था बचपन का दूसरा रूप होती है । इस अवस्था में मन कोमल और नाजुक होता है। पेशे से वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉक्टर राजेश्वरी ने बताया कि इन लोगों को शुरूआत में वर्तमान परिस्थिति को समझाने में बहुत दिक्कत सामने आई। यह लोग समझने को तैयार नहीं थे। बार-बार बाहर जाने की जिद करते थे। उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए एक बार बाहर निकल जाने पर दोबारा अंदर प्रवेश ना मिलने की धमकी देनी पड़ती थी और साथ ही घर वापस भेज देंगे कह कर डराया जाता था। हालांकि धीरे धीरे उन्हें समाचार देखकर स्थिति की गंभीरता का भान हुआ और उन्होंने अपने आप को उस हिसाब से ढाल लिया।

इटली,अमेरिका और चीन जैसे देशों में कोरोनावायरस से ज्यादा मौतों की एक बड़ी वजह वहां की आबादी का बूढ़ा होना है। भारत में वृद्धजनों की आबादी इन देशों की तुलना में काफी कम है। लेकिन सरकार को तमाम वृद्ध आश्रमों की तरफ विशेष ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें तमाम ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध हों और जरूरी सामान की निर्बाध आपूर्ति 24x7 हो।

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