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श्रीलंका ने भारत से मुद्रा विनिमय का किया अनुरोध

कोविड-19 के चलते डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए श्रीलंका ने भारत से 40 करोड़ डॉलर की अदला-बदली का करार मंज़ूर किया है

Archna Jha
Archna Jha | 29 Apr, 2020 | 5:20 pm

कोविड-19 महामारी के चलते भारत कईं देशों के लिए एक मददगार के रुप में उभऱ कर सामने आया है। फिर वह चाहे 130 देशों को हाइड्रोक्सोक्लोरोक्वीन निर्यात करने का फैसला हो या फिर कोरोना के चलते श्रीलंका की डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने का फैसला। दरअसल, कोरोना वायरस के चलते बैंकों में किए गए अतिरिक्त निवेश, राहत इंतज़ाम में हो रहे अतिरिक्त खर्चे और बढ़ते आयात की वजह से श्री लंका का विदेशी मुद्रा भंडार डगमगाने लगा है, ऐसे में अपनी मुद्रा को गिरने से बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए श्रीलंका ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI ) के साथ 40 करोड़ डॉलर मुद्रा की अदला-बदली करने का फैसला लिया है।

Main
Points
कोविड-19 की वजह से श्रीलंका के विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट
भारत के साथ किया 40 करोड़ डॉलर की अदला-बदली का करार
इससे देश को कम समय की अंतर्राष्ट्रीय ज़रुरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी: बंडुला गुणावर्धन, केन्द्रीय मंत्री
सार्क देशों को महामारी के वक्त मुद्रा उपलब्ध करवाने के लिए RBI प्रतिबध्द है

क्या है भारत-श्रीलंका मुद्रा करार

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और श्रीलंका सरकार के बीच 40 करोड़ डॉलर की अदला-बदली का फैसला लिया गया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति की अध्यक्षता में इस प्रस्ताव को मंज़ूरी मिल चुकी है। इस करार के तहत श्रीलंका को RBI श्रीलंकाई रुपये के बदले, मौजूदा विनिमय दरों पर 40 करोड़ डॉलर देगा और बाद में इन्ही दरों पर इसका उल्टा सौदा किया जाएगा, यानि श्रीलंका भारत से अपनी मुद्रा वापस लेकर 40 करोड़ डॉलर भारत को लौटा देगा। पिछले महीने हुई सार्क देशों की बैठक में भी श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कोविड-19 की वजह से वहां की बेहाल हुई अर्थव्यवस्था का ज़िक्र किया था। बता दें, कि श्रीलंका की एक तिहाई आय टुरिज़म से होती है और कोरोना के चलते यह कारोबार पूरी तरह से ठप्प हो चुका है। आम तौर पर किसी भी देश की सरकार अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए या तो खुले बाज़ार में डॉलर खरीदने का विकल्प चुनती है या फिर कर्ज़ पर डॉलर लेती है। वर्तमान स्थिति में श्रीलंका के दोनो ही विकल्प पर चोट पहुंची है। एक ओर, जहां घरेलू मुद्रा पर मार पड़ी है वहीं कर्ज़े पर डॉलर लेना मतलब ब्याज का खर्च श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था को और बेहाल कर देगा । ऐसे में श्रीलंका सरकार का यह फैसला काफी हद तक वहां की डूबती अर्थव्यवस्था को बचा सकता है।

क्या कहना है श्रीलंका सरकार का

श्रीलंका मंत्रिमंडल के सह प्रवक्ता और सूचना एंव संचार मंत्री बंडुला गुणावर्धन के अनुसार- “केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे की तरफ से वित्त मंत्री के रुप में रखे गए भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ वित्तीय सुविधा संबधी प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। इससे देश को कम समय की अंतर्राष्ट्रीय ज़रुरतों को पूरा करने में मदद  मिलेगी।”

करेंसी बदलने की आवश्यकता क्यों होती है

ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में देशों को विदेशी मुद्रा की ज़रुरत पड़ना आमबात है उदाहरण के तौर पर यदि किसी देश को दूसरे देश से कोई सामान खरीदना है तो, इस स्थिति में उस देश की मुद्रा के रुप में ही कीमत चुकानी होती है, इसलिए भी मुद्रा विनिमय की आवश्यकता पड़ती है। दूसरी बात, BALANCE OF PAYMENT (BOP)  या बाहरी देशों से सामान आयात करने के लिए आवश्यक मुद्रा का हिस्सा बहुत कम समय के लिए बचा हो, तो इस स्थिति में भी डॉलर या अन्य मुद्रा की आवश्यकता पड़ती है, जिसके चलते ऐसे देश INTERNATIONAL MONETRY FUND (IMF)  से आर्थिक मदद लेते हैं। विशेषकर 2008 में आई वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सभी देशों में कुछ शर्तों के आधार पर मुद्रा की अदला-बदली सामान्य बात हो गई है।

बता दें कि नंवबर 2012 में सभी सार्क देशों और RBI के बीच महामारी के वक्त कम समय के लिए मुद्रा विनिमय या मनी स्वैप को लेकर एग्रीमेंट साइन हुआ था, जिसके चलते RBI डॉलर, यूरो या भारतीय रुपये को अन्य देशों को उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबध्द है।

Tags:
Covid 19   |  srilanka   |  India   |  money swap   |  Agreement

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