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20 हजार करोड़ की लागत वाली सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को मिली सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी


PB Desk
PB Desk | 30 Apr, 2020 | 5:13 pm

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को रोका नहीं जा सकता। अदालत ने इस योजना पर रोक लगाने  से इंकार कर दिया। बता दें कि एक याचिका केंद्र द्वारा पुनर्विकास योजना की भूमि उपयोग में बदलाव को सूचित करने को लेकर दायर की गई थी।

Main
Points
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को मिली SC की मंजूरी
20 हजार करोड़ की लागत वाला है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट
2024 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट

गौरतलब है कि सरकार द्वारा सेंट्रल विस्टा को पुनर्विकसित करने की योजना को मंजूरी मिल चुकी है और इसके लिए 2024 डेडलाइन तय की गई है। केंद्र सरकार की यह योजना करीब 20 हजार करोड़ रुपये की है और इसी साल केंद्र ने संसद, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसी संरचनाओं द्वारा चिह्नित लुटियंस दिल्ली के केंद्र में लगभग 90 एकड़ भूमि से संबंधित भूमि उपयोग में बदलाव को अधिसूचित किया गया था।

संसद भवन, केंद्रीय सचिवालय और इसके आसपास राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैले हरित क्षेत्र में मौजूद सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास की महत्वाकांक्षी योजना को आकार दिया जाएगा। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर के दायरे में मौजूद 'सेंट्रल विस्टा क्षेत्र' को 2021 तक नया रूप दिया जाना है। जबकि मौजूदा और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक संसद भवन की नई इमारत का निर्माण 2022 तक और तीसरे चरण में सभी केन्द्रीय मंत्रालयों को एक ही स्थान पर समेकित करने के लिये प्रस्तावित समग्र केन्द्रीय सचिवालय का निर्माण 2024 तक करने का लक्ष्य है।

सेंट्र्ल विस्टा परियोजना के तहत नए सचिवालय में 10 भवन बनाए जाएंगे। संसद भवन के ठीक बगल में नया संसद बनाया जाएगा। नॉर्थ और साउथ ब्लाक को एक कर म्यूजियम में परिवर्तित किया जाएगा, साथ ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) को उसके वर्तमान स्थल से कहीं और स्थानांतरित किया जा सकता है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, विभिन्न मंत्रालयों के लिए एक साझा केंद्रीय सचिवालय निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए आईजीएनसीए इमारत के अलावा उद्योग भवन, निर्माण भवन, शास्त्री भवन, उपराष्ट्रपति आवास सहित नौ अन्य इमारतों को ध्वस्त किया जा सकता है। इसके अलावा राष्ट्रीय अभिलेखागार के मॉडल को भी बदला जाएगा।

नए प्रस्तावित योजना के तहत प्रधानमंत्री आवास और कार्यालय में भी परिवर्तन देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार का कहना है कि झोपड़ियों द्वारा किए गए अतिक्रमण के कारण लगभग 90 एकड़ प्रमुख भूमि बर्बाद हो गई है। इस जगह का उपयोग साउथ ब्लॉक के पीछे प्रधानमंत्री के लिए नया आवास और ऑफिस बनाने के लिए किया जाएगा। दोनों को इस तरीके से बनाया जाएगा कि प्रधानमंत्री आवास से ऑफिस पैदल भी जा सकें। इसके अलावा उपराष्ट्रपति के आवास को भी बदला जाएगा। उपराष्ट्रपति का नया पता नार्थ ब्लॉक के उत्तर में प्रधानमंत्री के घर के ठीक सामने होगा।

वर्तमान में नार्थ और साउथ ब्लॉक में केंद्र सरकार के अहम मंत्रालय हैं। इनमें वित्त, रक्षा और गृह के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय शामिल है। लेकिन नए प्रस्तावित संरचना के तहत दोनों ब्लॉक को मिलाकर इसे केंद्रीय म्यूजियम बना दिया जाएगा। इन विभागों के मंत्रियों का कार्यालय भी कॉमन सचिवालय में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

अभी सेंट्रल विस्टा में 51 में से सिर्फ 22 मंत्री ही बैठते हैं। आने वाले समय में सभी एक साथ बैठेंगे। इसमें कुल 10 बिल्डिंग बनाए जाएंगे, जहां लगभग 70 हजार केंद्रीय कर्माचारी काम करेंगे। प्रस्तावित भवनों में से किसी की भी ऊंचाई इंडिया गेट से अधिक नहीं होगी। सभी भवनों को अंडरग्राउंड रास्तों से जोड़ा जाएगा। सभी भवन केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से सीधे जुड़े होंगे।

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Supreme court   |  SC   |  India   |  Central Vista   |   Indian   |  Govt

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