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लोकसभा में आजः किसानों से जुड़े दो अहम बिलों पर होगी चर्चा

मानसून में लोकसभा के कामकाज का आज तीसरा दिन है। दो दिन खासे व्यस्त रहे हैं और आने वाले दिन भी व्यस्त रहने की ही संभावना है क्योंकि काम काफी है और समय कम। लोकसभा स्पीकर भी सभी काम निपटाने की मंशा के साथ सदन चलाते दिख रहे हैं। विपक्ष को हंगामा और शोरशराबा करने का अधिक अवसर नहीं मिल पा रहा है। तीसरे दिन यानी 16 सितंबर को लोकसभा के एजेंडा में कई काम हैं।

PB Desk
PB Desk | 16 Sep, 2020 | 11:33 am

मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में कई बिल पेश किए गए। इनमें से 2 बिल किसानों से संबंधित हैं। एक है कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 और दूसरा है कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि करार विधेयक 2020।

Main
Points
लोकसभा में कृषि मंत्री ने पेश किए थे दो बिल
दोनों बिल खेती-किसानी से हैं संबंधित
विपक्ष कर रहा है इन बिलों का विरोध

पहले ही दिन पेश हुए थे बिल

सरकारी भाषा हमेशा ही थोड़ी कठिन होती है इसलिए हम इसे आसान भाषा में समझा देते हैं। पहला बिल किसानों और व्यापारियों के बीच एक एेसे गठजोड़ की संभावना को लेकर है, जिससे किसान को अपनी फसल को कहीं भी लाभकारी कीमत पर बेचने का अधिकार मिले। इसमें विभिन्न सरकारी कृषि उपज संबंधी कानूनों-नियमों के तहत आने वाले बाजारों से बाहर के बाजार तक किसान की पहुंच करने की बात भी है।

खेती-किसानी में निजी क्षेत्र के प्रवेश का प्रस्ताव

दूसरा विधेयक किसानों के फसलों के मिलने वाली कीमत से संबंधित है और खेती किसानी के व्यापारिक यानी फसल बेचने के मुद्दे से जुड़ा है और सरकार इसे सरल बनाकर निजी क्षेत्र के लिए खोलना चाहती है। यह अधिकांश छोटे किसानों पर केंद्रित बिल है। पहले दिन लोकसभा में इन बिलों का विरोध किया गया औऱ कांग्रेस ने खासतौर पर इनका विरोध किया। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह बिल किसान विरोधी हैं और इनका पहले से ही देश के कुछ राज्यों के किसान विरोध कर रहे हैं। आज की चर्चा में इन बिलों पर और बातें आगे सामने आएंगी। बिलों पर चर्चा के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इन्हें सदन में पारित करने का प्रस्ताव भी करेंगे। यानी आज के कामकाज में इन दो बिलों को पारित कराना ही सरकार की प्राथमिकता होगी औऱ सदन में सरकार का बहुमत देखते हुए यह मुश्किल भी नहीं लगता है।

भारत में अधिकांश छोटे किसान

भारत में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत हैं, जिन्हें अक्सर एक हेक्टेयर से भी कम अथवा महज एक से लेकर दो हेक्टेयर तक की कृषि जोत पर ही अपना पसीना बहाने पर विवश होना पड़ता है। भारत में जितने भी ग्रामीण परिवार हैं उनका लगभग 57.8 प्रतिशत कृषि क्षेत्र के भरोसे ही अपना जीवन यापन कर रहा है। इनमें से 69 प्रतिशत से भी अधिक परिवारों के पास या तो मामूली कृषि जोत हैं या उन्हीं पर अपना सारा पसीना बहाकर इन परिवारों को किसी तरह अपना जीवन गुजर-बसर करना पड़ता है। वहीं, दूसरी ओर 17.1 प्रतिशत परिवारों को छोटी कृषि जोत के भरोसे ही अपना काम चलाना पड़ रहा है। भारत के लगभग 72.3 प्रतिशत ग्रामीण परिवार कृषि क्षेत्र में या तो किसान या कृषि मजदूरों के रूप में काम करते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना का यह आंकड़ा है।

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Lok Sabha   |  Monsoon Session   |  Parliament   |  Farmer   |  Bill

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