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मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उद्धव ठाकरे का चुनाव जीतना ज़रुरी

निर्वाचन आयोग को महाराष्ट्र के मुख्य सचिव का 30 अप्रैल, 2020 का लिखा एक पत्र मिला है, जिसमें, उन्होंने महामारी को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कई उपायों की जानकारी दी है और कहा कि राज्य सरकार के आकलन के अनुसार विधान परिषद् की खाली नौ सीटों पर सुरक्षित माहौल में चुनाव कराए जा सकते हैं। राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग को भरोसा दिया है कि चुनाव के दौरान सामाजिक दूरी का पालन होगा और माहौल स्वच्छ होगा ।

Abhishek Dubey
Abhishek Dubey | 02 May, 2020 | 2:38 pm

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन वो अभी तक विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने राज्य में विधान परिषद चुनाव (MLC) कराने का फैसला ले लिया है। आयोग की ओर से जारी नोटिफिकेशन में ये जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक, राज्य की 9 सीटों पर अब 21 मई को चुनाव होगा।

Main
Points
चुनाव आयोग ने राज्य में विधान परिषद चुनाव (MLC) कराने का फैसला लिया है
विधान परिषद की रिक्त 9 सीटों पर अब 21 मई को चुनाव होगा
निर्वाचन आयोग को महाराष्ट्र के मुख्य सचिव ने 30 अप्रैल को लिखा था पत्र
आयोग ने मुख्य सचिव को एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति करने का दिया निर्देश

 

कैसे होता है विधान परिषद चुनाव (MLC) और कैसे चुने जाते हैं इसके सदस्य।

आसान भाषा में समझते हैं कि भारत में एक सरकार केंद्र में होती है और एक सरकार राज्य में होती है। जिस तरह केंद्र में संसद होती है, उसी तरह से राज्यों में विधानमंडल होता है। अनुच्छेद 168 के अनुसार विधानमंडल में दो सदन होते हैं। एक का नाम 'विधान परिषद' और दूसरे का नाम 'विधान सभा' । ये विधान परिषद चुनाव 6 राज्यों में आयोजित किए जाते हैं। बिहार, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश। इन सभी राज्यों में विधान मंडल के दो सदन होते हैं। जिसमें उच्च सदन को विधान परिषद और निम्न सदन को विधान सभा कहते हैं। वहीं भारत के शेष राज्यों में केवल एक सदन होते हैं, जिसका नाम होगा विधान सभा।

किसे कहते हैं विधान मंडल

जिस तरह केंद्र सरकार का कानून संसद में बनता है, ठीक उसी तरह राज्यों में कानून विधानमंडल में तैयार किया जाता है। जिन राज्यों में विधान परिषद है, उसमें इसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्षों का होता है लेकिन प्रत्येक दो साल पर एक तिहाई सदस्य रिटायर हो जाते है।

कैसी होती है चुनाव की प्रक्रिया

विधान परिषद का चुनाव आम चुनाव नहीं होता । इस चुनाव में चार तरह की संस्थाओं का अहम रोल होता है। यानी चार तरह से विधान परिषद का सदस्य चुना जाता है।

1. राज्य के MLA चुनते हैं। वह केवले एक तिहाई सदस्यों को चुन सकते हैं। आपको बता दें, नियम ये है कि विधान परिषद के सदस्यों की संख्या, विधान सभा के सदस्यों की संख्या से एक तिहाई से ज्यादा नहीं हो सकती है। इसी के साथ ये भी नियम है कि विधान परिषद में 40 से कम सदस्य भी नहीं होने चाहिए।

2. एक तिहाई राज्य की स्थानीय सरकारें यानी नगर पालिका और जिला बोर्ड के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं।

3. 1/12 वह छात्र चुनेगें जिन्हें ग्रेजुएशन किए हुए तीन साल पूरे हो चुके हैं।

4. जिसके बाद 1/12 सदस्यों का चुनाव राज्य के शिक्षक करते हैं। इसमें प्राइमरी में पढ़ाने वाले शिक्षक शामिल नहीं है।

निर्वाचन आयोग को महाराष्ट्र के मुख्य सचिव ने लिखा पत्र

निर्वाचन आयोग को महाराष्ट्र के मुख्य सचिव का 30 अप्रैल, 2020 का लिखा एक पत्र मिला है, जिसमें, उन्होंने महामारी को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कई उपायों की जानकारी दी है और कहा कि राज्य सरकार के आकलन के अनुसार विधान परिषद् की खाली नौ सीटों पर सुरक्षित माहौल में चुनाव कराए जा सकते हैं। राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग को भरोसा दिया है कि चुनाव के दौरान सामाजिक दूरी का पालन होगा और माहौल स्वच्छ होगा । लॉकडाउन के कारण फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और दूसरे व्यक्तियों की आवाजाही की अनुमति से संबधित केंद्रीय गृह मंत्रालय के 29 अप्रैल 2020 के आदेश का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि वह चुनाव कराते समय गृह मंत्रालय के इन आदेशों के पालन का पूरा ध्यान रखेगी।

महाराष्ट्र के राज्यपाल ने भी लिखा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को महाराष्ट्र के राज्यपाल की ओर से 30 अप्रैल 2020 को लिखा एक डीओ पत्र भी मिला है जिसमें राज्य में विधान परिषद् की खाली सीटों पर चुनाव कराने के बारे में कहा गया है। पत्र में राज्यपाल ने यह भी कहा है कि श्री उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने 28 नवंबर, 2019 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पद की शपथ लेने के छह महीने की अवधि के भीतर यानी 27 मई, 2020 या उससे पहले उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा या विधानमंडल का सदस्य बनना जरुरी है। उन्होंने यह भी लिखा है कि जमीनी स्तर पर अब स्थितियों ठीक हैं सरकार द्वारा दी गई छूट के बाद से इसमें सुधार होता दिखाई दे रहा है। इसलिए, पूरी स्थिति को ध्यान में रखते हुए, निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया गया है कि चुनाव कराने के तौर-तरीकों पर विचार किया जाए। निर्वाचन आयोग ने  विभिन्न राजनीतिक दलों- महाराष्ट्र विधानमंडल कांग्रेस पक्ष, शिव सेना विधी मंडल पक्ष, और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से उक्त चुनाव कराए जाने के बारे में किए गए अनुरोध का भी संज्ञान लिया।

इससे पहले भी हो चुके हैं ऐसी परिस्थिति में चुनाव

आयोग ने ऐसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में पिछले उदाहरणों की समीक्षा की जब उसने पूर्व प्रधानमंत्रियों के मामलों में 1991 में पी.वी. नरसिम्हा राव, 1996 में एचडी देवेगौड़ा और कई राज्यों के मुख्यमंत्री (जैसे 1991 में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत, 1997 में बिहार की मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी, 1993 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विजय भास्कर रेड्डी तथा 2017 में उत्तर प्रदेश और चार अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री और 2017 में नागालैंड के मुख्यमंत्री के संबंध में समान संवैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपचुनाव कराए थे। इन सभी बातों को ध्यान में रखने के बाद, आयोग ने महाराष्ट्र में द्विवार्षिक चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है।

 आयोग की केंद्रीय गृह सचिव से मांग, चुनाव ठीक से कराने के लिए वरिष्ठ अधिकारी करें नियुक्त

आयोग ने यह भी निर्णय लिया कि केंद्रीय गृह सचिव, जो आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत  राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष हैं, को अधिनियम के प्रावधानों के तहत चुनाव के लिए निर्वाचन प्रक्रिया का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त करना चाहिए।

कोविड19 के लिए दिए गए निर्देशों का अनुपालन बेहद ज़रूरी

आयोग ने मुख्य सचिव को राज्य से एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति करने का भी निर्देश दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव कराने की व्यवस्था करते समय कोविड-19 के बारे में दिए गए निर्देशों का अनुपालन किया जाए। आयोग ने इस चुनाव के लिए महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। आयोग ने अगले सप्ताह में पूर्व में स्थगित किए गए अन्य चुनावों की समीक्षा करने का भी निर्णय लिया है

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