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कोरोना ने दुनिया में मचाया हाहाकार,तो वहीं सूरज पर भी पड़ा प्रभाव


Alisha
Alisha | 05 May, 2020 | 5:28 pm

कोरोना वायरस के चलते पूरी पृथ्वी में उथल पुथल देखी जा रही है | देश भर में लॉकडाउन की वज़ह से आसमान साफ़ नज़र आ रहा है| प्रदुषण में गिरावट आई है, तो वहीं दसूरी तरफ पृथ्वी पूरी तरह साफ नज़र आ रही है| इन्ही सब बदलाव को देखते हुए वैज्ञानिकों का दावा है कि, पृथ्वी को सबसे ज़्यादा ऊर्जा देने वाले सूरज की रोशनी कम हो गई है| सूरज आकाशगंगा में मौजूद अन्य तारों से भी रोशनी में कमज़ोर पड़ गया है| बताया जा रहा है कि, सूरज की रोशनी बहुत ही कमज़ोर हो गई है| वैज्ञानिक इसकी वजह तलाशने में जुटे हुए है|

Main
Points
पिछले 9000 सालों से सूरज की चमक हो रही है कम
सूरज की तुलना में आकाशगंगा में दिखे अन्य तारे एक्टिव
सूरज की सतह पर सोलर स्पॉट बनने में आई कमी
अमेरिका अंतरिक्ष एजेंसी नासा के केपलर स्पेस टेलिस्कोप से किया अध्ययन

9000 सालों से सूरज की रोशनी हो रही है कम

सूरज पृथ्वी को ऊर्जा देने वाला इकलौता स्रोत है| जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने ये दावा किया है कि, पिछले 9000 सालों से सूरज की रोशनी लगातार कमज़ोर हो रही है|  इसकी चमक कम हो रही है|

अध्ययन में हुआ खुलासा

मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने अमेरिका अंतरिक्ष एजेंसी नासा के केपलर स्पेस टेलीस्कोप से मिले आंकड़ों का अधययन कर के ये खुलासा  किया है कि, हमारे आकाशगंगा में मौजूद सूरज जैसे अन्य तारों की तुलना में अपने सूरज की दमक बहुत ही कमज़ोर हो गई है|

क्या हो रही है किसी भयानक हादसे की तैयारी?

वैज्ञानिक अभी तक ये अनुमान नहीं लगा पाएं है कि, कहीं ये किसी तूफ़ान से पहले की शांति तो नहीं है |  सूरज और उसके जैसे अन्य तारों का अध्ययन उनकी उम्र, चमक और रोटेशन के आधार पर लिया गया है| इन तीनों का अध्ययन कर के ये पता चल पाया है कि 9000 सालों में पांच गुना चमक में कमी आई है|

सोलर स्पॉट की संख्या में आई कमी

मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. एलेक्जेंडर शापिरो ने बताया कि, हम हैरान हैं सूरज से ज़्यादा एक्टिव अन्य तारे आकाशगंगा में मौजूद है| हमने सूरज की उसके जैसे 2500 तारों से तुलना की है, उसके बाद  इस निष्कर्ष पर पहुंचे है| सूरज पर रिपोर्ट तैयार करने वाले दूसरे वैज्ञानिक डॉ. टीमो रीनहोल्ड ने बताया कि, सूरज पिछले कुछ हज़ार सालों से शांत है| ये अंदाज़ा हमे सूरज की सतह पर बनने वाले सोलर स्पॉट से पता लग जाता है|  आपको बता दें की पिछले कुछ वर्षों में सोलर स्पॉट में भी कमी दर्ज की गई है|

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