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बिहार के छात्रों से नितीश कुमार का सौतेला व्यवहार! विपक्षियों ने साधा निशाना


Ankit Mishra
Ankit Mishra | 20 Apr, 2020 | 6:08 pm

योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन में राजस्थान के कोटा में फंसे प्रदेश के छात्रों को वापस लाने का फैसला किया । अब ये फैसला बिहार के सीएम नीतीश कुमार के लिए गले की फांस बन गया है। प्रवासी मजदूरों को लेकर पहले ही विपक्ष के निशाने बने हुए नीतीश कुमार अब दूसरे राज्यों में पढ़ रहे छात्रों के मुद्दे पर भी विपक्ष के सवालों के सामने आकर खड़े हो गये हैं।

Main
Points
योगी सरकार ने कोटा से प्रदेश के छात्रों को वापस लाने का लिया फैसला
बिहार की नीतीश कुमार सरकार के लिए फैसला बना गले की फांस
हजारों की संख्या में बिहार के छात्र दूसरे राज्यों में फंसे
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की
बिहार में विपक्ष ने एक सुर में नीतीश कुमार के बयान को बताया अकर्मण्यता

क्या है मामला

राजस्थान के कोटा में इंजीनियरिंग और मेडिकल से जुड़ी तैयारियों के लिए लगभग 40 हजार छात्र रहते हैं। जिनमें अधिकतर यूपी और बिहार से हैं। यूपी सरकार ने प्रदेश के 7500 छात्रों को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी, साथ ही राजस्थान सरकार से समन्वय बिठाकर 300 बसें कोटा भेज दी। 3000 छात्र झांसी और आगरा लाये जा चुके हैं। इसके बाद इन छात्रों को इनके गृह जनपद भेजा जायेगा जहां इन्हें 14 दिन क्वारंटीन में रखा जाना है।

सीएम नीतीश कुमार कहां फंसे

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोटा से छात्रों को वापस लाये जाने का विरोध किया है। उनके मुताबिक यह लॉकडाउन के नियमों और उद्देश्य के खिलाफ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बिहार के बाहर रहने वाले लोगों की स्थानीय स्तर पर मदद कर रहा है। यूपी सरकार के इस फैसले से देश के दूसरे राज्यों पर भी अपने लोगों को वापस लाने का दबाव बनेगा। नीतीश कुमार के बिहार के छात्रों को वापस न लाने के पीछे का तर्क अब नीतीश कुमार पर ही भारी पड़ता नजर आ रहा है।

विपक्ष ने साधा निशाना

हालांकि  नीतीश कुमार के इस बयान के बाद बिहार की सियासत थोड़ी गर्म हो गई। विपक्ष ने एक सुर में नीतीश कुमार के इस बयान को उनकी अकर्मण्यता बताया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की। साथ ही नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर एक पत्र भी साझा किया। इस पत्र में तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर प्रदेश के बाहर फंसे गरीब मजदूरों और छात्रों को बेसहारा छोड़ने का आरोप लगाया है। तेजस्वी यादव ने सवाल किया कि प्रवासी मज़दूर और छात्रों के प्रति आखिर सरकार इतनी असंवेदनशील क्यों है?

इसके अलावा सांसद पप्पू यादव,  जेडीयू के पूर्व उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर, पूर्व सांसद  उपेंद्र कुशवाहा समेत तमाम विपक्षी नेताओं ने इस मामले पर नीतीश कुमार को कठघरे में खड़ा किया। इन नेताओं के अनुसार अगर योगी सरकार यह फैसला ले सकती है तो बिहार सरकार क्यों नहीं?

बिहार के कितने छात्र फंसे हैं

मोटे आंकड़े की बात की जाऐ तो बिहार के छात्रों का आंकड़ा करीब 6000-7000 की संख्या का है जो दूसरे राज्यों में पढ़ाई के लिए गये थे और लॉकडाउन के कारण फंस गये हैं। हांलाकि बिहार सरकार ने इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं जारी किया है।

अन्य राज्यों ने भी उठाये हैं कदम

यूपी दूसरे राज्य से अपने प्रदेशवासियों को बुलाने वाला पहला राज्य नहीं है। लॉकडाउन होने के तुरंत बाद ही गुजरात सरकार ने हरिद्वार से 1800 लोगों को बसों से वापस अपने राज्य लाने का प्रबंध किया था। इससे पहले भी यूपी, बसों से दिल्ली एनसीआर में फंसे अपने नागरिकों को उनके घर पहुंचा चुकी है। दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बनारस में फंसें थे। तक़रीबन 900 श्रद्धालुओं को वापस उनके राज्य भेज दिया गया है।

पहले भी किया है ऐसे फैसलों का विरोध

नीतीश कुमार ने इससे पहले भी ऐसे कदमों का विरोध किया है। दिल्ली से उत्तर प्रदेश सरकार बड़ी मात्रा में बिहार के प्रवासियों को भी लायी थी लेकिन उस समय भी नीतीश कुमार ने उन प्रवासियों को राज्य की सीमा में आने से रोका था। पिछले सप्ताह ही कोटा से कुछ छात्र जिला प्रशासन से ई-पास बनवा खुद के साधन से बिहार निकले थे। पर उन्हें भी सरकार ने सीमा पर ही रोक दिया।

अनुरोध के सहारे बिहारी प्रवासी

प्रदेश के बाहर रह रहे प्रवासी मजदूरों और छात्रों को इस संकट से उबारने के लिए बिहार सरकार के कार्यों के बारे में पूछने पर जदयू नेताओं के पास सिर्फ यही जवाब होता है कि वह संबंधित राज्य सरकारों से बात कर उनकी मदद करने के लिए अनुरोध कर रहे हैं। 

सरकार के अपने स्तर पर किये गए कार्यों में बस 10 लाख 31 हजार प्रवासी मजदूरों के खाते में डाली गई 1 हजार की राशि का ही जिक्र कर पाते हैं। हालाँकि 25  मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन में 25 दिन गुज़र चुके हैं और तकरीबन 15 दिन और बाकी हैं। अब यह सोचने की बात है कि यह 1 हजार रुपया इन मजदूरों के कितने काम आएगा।

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