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अमेरिका का सख्त कदम, विश्व स्वाथ्य संगठन के फंड पर लगाई रोक


Manmeet Singh
Manmeet Singh | 15 Apr, 2020 | 2:11 pm

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अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) पर बड़ी कार्यवाही करते हुए उसे दिए जाने वाली आर्थिक सहायता पर रोक लगा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना वायरस के कारण उपजी विषम परिस्थितियों का आकलन करने में नाकाम रहा है जिस कारण उसकी भूमिका की जांच होगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने संगठन की जवाबदेही तय करने की भी बात कही। विश्व स्वास्थ्य संगठन को सालाना 40-50 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद देता है अमेरिका।

Main
Points
अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के फंड पर लगाई रोक
WHO की भूमिका का होगा आंकलन- ट्रंप प्रशासन
कोरोनावायरस से बनी स्थिति का आकलन करने में नाकाम रहा है
WHO को सालाना 40-50 करोड़ डॉलर का फंड देता है अमेरिका
संगठन का नाम बदलकर 'चीनी स्वास्थ्य संगठन' कर देना चाहिए- जापान

कितना प्रभावित होगा WHO

यह जानने के लिए हमें विश्व स्वास्थ्य संगठन में अमेरिका के योगदान को समझना होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन फंड दो तरीके से जुटाता है- असेस्ड कॉन्ट्रिब्यूशन और स्वैच्छिक योगदान। असेस्ड कॉन्ट्रिब्यूशन में योगदान के मामले में अमेरिका की हिस्सेदारी 22 फीसदी तक रही है। साल 2010 से 2017 के बीच अमेरिका ने 107 मिलियन डॉलर से 114 मिलियन डॉलर के करीब धनराशि संगठन को मदद के रूप में थी। वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन में भी अमरीका ने वर्ष 2017 में 401 मिलियन डॉलर का योगदान दिया था जो 2016-17 में डब्लूएचओ को मिलने वाले कुल वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन का ये 17 फ़ीसदी था। आंकड़े ये स्पष्ट कर रहे है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन फंड के मामले में अमरीका पर काफ़ी हद तक निर्भर है।

किसका है कितना योगदान

बड़े अंशदाताओं की बात करें तो कंट्रीब्यूटर्स  में अमेरिका के बाद चीन ($28.7m), जापान($20.5m), जर्मनी ($14.6m) और यूके ($10.9m) की बारी आती है।

स्वैच्छिक अंशदाताओं में अमेरिका के बाद संयुक्त राष्ट्र, कोरियाई गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया और बिल गेट्स फाउंडेशन हैं। इस सूची में चीन दूर-दूर तक कहीं नजर नहीं आता।

WHO क्यों है कटघरे में

विश्व स्वास्थ्य संगठन के ढीले रवैए की वजह से उसकी विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विश्व के तमाम नेताओं ने संगठन पर चीन की तरफदारी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कोरोना वायरस की वास्तविक स्थिति को WHO ने दुनिया से छुपाए रखा। यदि संगठन ने चीन में जमीनी स्तर पर स्थिति का सही आकलन कर दुनिया के सामने सटीक आंकड़े पेश किए होते तो स्थिति आज इतनी भयावह ना होती। WHO पर यह भी आरोप लगे हैं कि उसने कोरोना को महामारी घोषित करने में काफी देर कर दी।

ताइवान ने सार्वजनिक किया ई-मेल

31 दिसंबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन को भेजे गए ई-मेल को ताइवान ने सार्वजनिक कर दिया है। ताइवान के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि गत 31 दिसंबर को हमनें ईमेल करके विश्व स्वास्थ्य संगठन को चीन में विचित्र निमोनिया जैसी बीमारी के होने की बात बताई थी। इस ईमेल में चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने SARS के ना होने की बात कही थी लेकिन नमूनों की जांच और मरीजों को आइसोलेशन में रखने की बात का भी उल्लेख है।

इस पर WHO पल्ला झाड़ते हुए शब्दों से खेलना शुरू किया। उसे कहना है कि इस ईमेल में सिर्फ मरीजों के आइसोलेशन में रखने की बात कही गई है। SARS जैसी बीमारी के संक्रमण का कोई जिक्र नहीं है।

किसने क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार जॉन बोल्टन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को चीन का अपराध संगी बताते हुए यह आरोप लगाया था कि कोरोनावायरस की स्थिति को लेकर WHO लगातार झूठ बोलता रहा है। उसने दुनिया को गुमराह किया है और चीन की वास्तविक तस्वीर तस्वीर सबसे छुपाई है।

वहीं अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज और मार्क रुबियो ने संगठन के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए पुनः आंकलन की मांग की है।

जापान के उप प्रधानमंत्री तारो आसो ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को लताड़ लगाते हुए उसे चीन का तरफदार बताया था। उन्होंने कहा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का नाम बदलकर चीनी स्वास्थ्य संगठन (CHO) कर देना चाहिए। विश्व पटल पर लगातार विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक के इस्तीफे की मांग उठ रही है। गौरतलब है कि महामारी की वजह से विश्व के तमाम देशों ने जब चीन पर यात्रा प्रतिबंध लगाए तब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उसकी आलोचना आलोचना की थी।

WHO की सफाई

इन तमाम आरोपों पर जवाब देते हुए डब्ल्यूएचओ के मुखिया टेडरोस अधानोम गेब्रियेसस ने विश्व से इस महामारी पर राजनीति न करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कि यह सही वक्त नहीं है। हम पहले ही हजारों लोगों को खो चुके हैं। हमें कोविड-19 को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

विश्व में अब तक कोरोना से 20 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं वहीं 1 लाख 26 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गवा दी है। 4 लाख 85 हजार 303 लोगों का सफल इलाज भी हुआ है।

Tags:
WHO   |  USA   |  CURBS   |  FUNDING   |  TRUMP   |  Covid-19

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