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दिल्ली में बैठकर पीलीभीत संसदीय क्षेत्र की सेवा करते हैं दूसरी बार सांसद बने वरुण गांधी

उत्तर प्रदेश की पीलीभीत लोकसभा सीट से बीजेपी के युवा नेता वरुण गांधी सांसद हैं। 2019 में वह यहां से दूसरी बार सांसद बने हैं। इसके पहले उनकी मां मेनका गांधी यहां से सांसद थीं। 2009 में वरुण यहां से पहली बार सासंद चुने गए थे।

PB Desk
PB Desk | 21 Aug, 2020 | 12:59 pm

उत्तर प्रदेश की पीलीभीत लोकसभा सीट से बीजेपी के युवा नेता वरुण गांधी सांसद हैं। 2019 में वह यहां से दूसरी बार सांसद बने हैं। इसके पहले उनकी मां मेनका गांधी यहां से सांसद थीं। 2009 में वरुण यहां से पहली बार सासंद चुने गए थे। जिस प्रकार इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए अमेठी और रायबरेली को परंपरागत संसदीय सीट माना जाता है, उसी प्रकार कहा जा सकता है कि पीलीभीत भी गांधी परिवार के इस दूसरे हिस्से यानी मेनका गांधी और वरुण गांधी के लिए परंपरागत सीट ही है। कभी मां तो कभी बेटा इस सीट से सांसद चुनकर लोकसभा में पहुंचते रहे हैं। यह तो बात हुई सीट के बारे में। अब बात करते हैं सांसद औऱ उनकी क्षेत्र में सक्रियता व कामकाज के बारे में। पार्लियामेंट्री बिजनेस ने पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी के बारे में तफ्सील से पड़ताल की तो यह सामने आया कि सांसद जी क्षेत्र के विकास की बात तो करते हैं, लेकिन यहां आते कम ही हैं। कोरोना महामारी की वजह से क्षेत्र में आना और भी कम हो गया है। वह दिल्ली में ही परिवार के संग रहते हैं। वहीं से डिजिटल माध्यम से क्षेत्र के लोगों और अधिकारियों से जुड़े रहते हैं और कामकाज कराते रहते हैं। हालांकि जनता को उनसे न मिल पाने की शिकायत है। कारोबारी भी शिकायती टोन में ही बात करते दिखे। पीलीभीत चावल और बांसुरी उद्योग के लिए विख्यात है। इन दोनों ही क्षेत्रों के उद्यमियों ने सांसद जी की नामौजूदगी की शिकायत की। आइए देखें कैसा है पीलीभीत के सांसद जी का रिपोर्ट कार्डः

Main
Points
उत्तर प्रदेश की पीलीभीत लोकसभा सीट से बीजेपी से वरुण गांधी सांसद हैं।
पीलीभीत में मेनका गांधी कई बार सांसद रहीं, मौजूदा समय में वरुण गांधी यहां से सांसद हैं।
पीलीभीत सबसे पिछड़े जिलों में से है।

क्या-क्या दिक्कतें हैं पीलीभीत में

पीलीभीत में मेनका गांधी कई बार सांसद रहीं और मौजूदा समय में वरुण गांधी यहां से सांसद हैं। पीलीभीत के विकास की बात की जाए तो पीलीभीत सबसे पिछड़े जिलों में से है। यहां विकास के नाम पर बड़ी रेल लाइन, एक फ्लाई ओवर आदि ही बन पाया है। वहीं बात उद्योगों की की जाए तो चावल उद्योग काफी कम होता जा रहा है। किसान गन्ने की फसल को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। बांसुरी उद्योग की बात की जाए तो बांसुरी उद्योग के लिए सांसद वरुण गांधी की तरफ से कोई योगदान नहीं दिया जा रहा है। बांसुरी उद्योग भी खत्म होता जा रहा है।

जानिए पीलीभीत संसदीय सीट के बारे में 

यूपी की पीलीभीत लोकसभा सीट में पांच विधानसभाएं हैं जिसमें पीलीभीत सदर, बीसलपुर, पूरनपुर, बरखेड़ा, और बहेड़ी शामिल हैं। आपको बता दें कि पीलीभीत की जनसंख्या करीब 20 लाख के आसपास है। पीलीभीत तराई का इलाका है और नेपाल बार्डर से सटा हुआ है। यहां के सांसदों की बात की जाए तो आजादी के बाद से सन 1952 में कांग्रेस से मुकुंद लाल निर्वाचित हुए। इसके बाद सन 1957, 1962,1967 व 1971 में प्रसोपा के मोहन स्वरूप निर्वाचित हुए थे। वहीं सन 1977 में शमसुल हसन खां जनता पार्टी से जीत हासिल कर निर्वाचित हुए। इसके बाद सन 1980 में कांग्रेस पार्टी से हरीश गंगवार निर्वाचित हुए। फिर सन 1984 में कांग्रेस (आई) से भानुप्रताप सिंह ने अपनी जगह बनाई और जीत हासिल की थी। वहीं सन 1989 में पहली बार गांधी परिवार की मेनका गांधी ने जनता दल पार्टी से जीत हासिल कर अपनी जगह बनाई जबकि सन 1991 में भाजपा से डॉ परशुराम गंगवार ने मेनका गांधी को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। सन 1996 में मेनका गांधी ने एक बार फिर जनता पार्टी से अपनी किस्मत आजमाई और रिकार्ड तोड़ जीत हासिल की।  इसके बाद मेनका गांधी ने सन 1998 में निर्दलीय अपनी किस्मत को आजमाया और जीत हासिल की। वहीं सन 1999 में सरकार गिर गई और दोबारा चुनाव हुए तो मेनका गांधी ने निर्दलीय ही अपनी किस्मत आजमाई और जीत हासिल की। मेनका गांधी ने यहां से 2004 मे पहली बार भाजपा के सिंबल से चुनाव लड़ा और चौथी बार तथा पांचवीं बार जीत हासिल की। इसके बाद सीटों में अदला बदली हुई। 2009 में पहली बार मेनका गांधी के पुत्र वरुण गांधी ने पीलीभीत सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2014 में एक बार पुनः मेनका गांधी जनता के बीच आईं और जीत हासिल की। अब 2019 में वरुण गांधी ने फिर से कमान संभाली, चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

कारोबारियों को सांसद से ज्यादा सक्रियता की आस

क्षेत्र में चावल मिल चलाने वाले विष्णु खंडेलवाल ने पार्लियामेंट्री बिजनेस से बातचीत में कहा कि पीलीभीत में चावल के कारोबार की असीम संभावनाएं हैं। यहां लंबे समय से चावल का कारोबार चलता रहा है। एेसे में अगर सांसद चावल उद्योग से जुड़े व्यापारियों व मिल मालिकों की तकलीफें सुनेंगे और उन्हें दूर कराने में मदद करेंगे तो क्षेत्र में न केवल यह उद्योग फलेगा-फूलेगा बल्कि क्षेत्र का आर्थिक विकास भी बेहतर होगा। रोजगार सृजन भी होगा। वहीं पीलीभीत के बांसुरी उद्योग में बड़ा नाम रखने वाले नवाब अहमद तो साफ तौर पर सांसद या विधायक से बांसुरी उद्योग को किसी प्रकार की मदद मिलने की बात से इनकार कर देते हैं। वह कहते हैं कि दिल्ली में एक बड़ा उद्योग मेला होता है। वहां से हमें विदेश तक से लंबे आर्डर मिलते हैं। अगर क्षेत्र के प्रतिनिधि भी इसमें सहयोग करें तो बांसुरी उद्योग का कायाकल्प हो सकता है। उद्योग व्यापार मंडल के जितेंद्र गुप्ता का भी कुछ एेसा ही कहना है। वह भी सांसद से काफी उम्मीद रखते हैं। हाालंकि सांसद प्रतिनिधि रमेश लोधी सांसद जी की सक्रियता की बात करते हैं, लेकिन वह इस बात का जवाब नहीं दे पाते कि आखिर वरुण गांधी अपने संसदीय क्षेत्र में कोरोना काल में आए क्यों नहीं। लोगों की दिक्कतें क्यों नहीं सुनीं। रमेश लोधी ने कहा कि सांसद वरुण गांधी ने क्षेत्र के विकास के लिए कई काम कराए हैं। वह लगातार डिजिटल मंचों पर अधिकारियों के संग मीटिंग करते हैं। कई कामों के लिए अनुरोध भी करते हैं। शहर में विपक्ष के नेता और सपा सरकार के पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा का कहना है कि वरुण गांधी ने बतौर सांसद क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया है। वह क्षेत्र से नदारद रहते हैं और लोगों की समस्याएं भी नहीं सुनते। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हरप्रीत चब्बा भी शिकायती लहजे में कहते हैं कि सांसद के तौर पर वरुण गांधी की सक्रियता क्षेत्र में बिल्कुल नहीं है। लोगों की समस्याएं सुनने के लिए वह नहीं आते, न ही क्षेत्र के लिए कोई काम कराते हैं।

जंगलों से घिरा है पीलीभीत

आपको बता दें कि पीलीभीत जनपद जंगल से घिरा हुआ है। यहां जंगली जानवरों का खौफ रहता है। सन 2014 में पीलीभीत में टाइगर रिजर्व बना। उस दौरान जंगल में बाघों की संख्या करीब 25 थी जो बढ़कर अब 65 हो चुकी है। वहीं पीलीभीत में पर्यटक स्थल है जिसका नाम चूका स्पॉट है। पीलीभीत में बांसुरी उद्योग, चावल उद्योग हैं। पीलीभीत बांसुरी नगरी भी कही जाती है। पीलीभीत की बांसुरी भारत ही नहीं विदेश में भी सप्लाई की जाती है। वहीं पीलीभीत में एल एच् शुगर फैक्ट्री व बजाज चीनी मिलें भी हैं। एक मंझोला चीनी मिल है जो कि बसपा शासन काल मे बंद हो चुकी है। जिसको शुरू करने के लिए कई प्रयास किये गए पर वो चालू नही हो पाई। पीलीभीत में कई बड़े मंदिर है तो एक जामा मस्जिद भी है। सभी धर्मों के लोग यहाँ निवास करते हैं। पीलीभीत में अंग्रेजो के जमाने की कई इमारतें व दरवाजे हैं जो अब जर्जर हो चुके हैं।

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Varun Gandhi   |  Pilibhit   |  Member   |  Of   |  Parliament   |  Uttar Pradesh

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