Your image is ready, you can save / share this image
Please wait!
#MPsPerformance


%
RANKINGOUT OF

जब महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों पर संसद ने अपनाया बेहद सख्त रुख

भारतीय दंड संहिता यानी Indian Penal Code भारत में कहीं भी किसी भी नागरिक की तरफ से किए गए अपराधों की परिभाषा करतR है और साथ ही दंड का प्रावधान भी करती है। भारत में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लगाम कसने के लिए सख्त रुख अपनाया और आईपीसी में अहम बदलावों को हरी झंडी दी।

PB Desk
PB Desk | 21 Feb, 2021 | 8:00 am

हम अक्सर सुनते आए हैं कि महिलाओं का सम्मान करना हम सबका अधिकार है। अफसोस कि यह बात सिर्फ एक स्लोगन बनकर रह गई है। 16 दिसंबर 2012 को सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरा भारत निर्भया कांड से थर्रा गया था लेकिन घटना के पूरे 9 साल होने के बावजूद तब से लेकर अबतक न जाने कितनी लड़कियां कभी छेड़-छाड़ तो कभी सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई हैं। इतना ही नहीं, दरिंदगी का ग्राफ कायम रहा है। निर्भया कांड के बाद देश की संसद ने मार्च 2013 में क्रिमिनल लॉ एक्ट, 2013 पारित किया और महिलाओं की सुरक्षा वाले कानून को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया गया। कानून में संशोधन के बाद धारा 354 को 4 भागों मे बांट दिया गया।

Main
Points
मार्च 2013 में क्रिमिनल लॉ एक्ट, 2013 संसद में पारित हुआ
महिलाओं की सुरक्षा वाले कानून को पहले से ज्यादा सख्त किया गया
कानून में संशोधन के बाद धारा 354 को 4 भागों मे बांटा गया

क्या है आईपीसी की धारा 354 ?

भारतीय दंड संहिता की धारा 354 का इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जाता है, जहां स्त्री की मर्यादा और मान सम्मान को क्षति पहुंचाने के लिए उस पर हमला किया गया हो या उसके साथ गलत मंशा के साथ जोर जबरदस्ती की गई हो। भारतीय दंड संहिता के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी महिला की मर्यादा को भंग करने के लिए उस पर हमला या जोर जबरदस्ती करता है, तो उस पर आईपीसी की धारा 354 लगाई जाती है जिसके तहत आरोपी पर दोष सिद्ध हो जाने पर दो साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है।

क्या है भारतीय दंड संहिता ?

भारतीय दंड संहिता यानी Indian Penal Code, IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक की तरफ से किये गये कुछ अपराधों की परिभाषा और दंड का प्रावधान करती है लेकिन यह भारत की सेना पर लागू नहीं होती है। आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में इसके स्थान पर पहले रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी। भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी सन् 1862 में ब्रिटिश काल के दौरान लागू हुई थी। इसके बाद समय-समय पर इसमें संशोधन होते रहे। विशेषकर भारत के स्वतन्त्र होने के बाद इसमें बड़ा बदलाव किया गया। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दंड संहिता को ही अपनाया। लगभग इसी रूप में यह विधान तत्कालीन ब्रिटिश सत्ता के अधीन आने वाले बर्मा, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर, ब्रुनेई में भी लागू कर दी गई थी। बता दें कि Anti Rape Law 2013 के बाद ही आईपीसी की धारा 354 के चार भाग बना दिए गए थे। धारा 354-A, 354-B, 354-C और 354-D।

IPC 354 A यानी यौन उत्पीड़न

भारतीय दंड संहिता की धारा 354A के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी महिला को गलत इरादे से छूता है, उस स्त्री से शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करता है, अश्लील चीजें उसकी मर्जी के खिलाफ दिखाने की कोशिश करता है या फिर कोई अश्लील कमेंट करता है तो उस व्यक्ति पर यौन उत्पीड़न के लिए IPC 354 A लगाई जाती है। प्वाइंट्स 1,2,3 के लिए 3 साल के लिए कारावास और अपराधिक और आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। यह एक जमानती और संघीय अपराध है। प्वाइंट 4 के लिए 1 साल की सजा और आर्थिक दंड दिया जा सकता है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं होता है।

IPC 354 B के प्रावधान

यह धारा किसी व्यक्ति पर तब लगाई जाती है जब किसी महिला पर निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला किया जाता है। या उस स्त्री को निर्वस्त्र करने के इरादे से अपराधिक बल का प्रयोग किया जाता है। धारा 354 बी के तहत अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उस व्यक्ति को कोर्ट से जमानत लेनी होती है। इस अपराध के लिए कम से कम 3 साल की सजा है और जो बढ़ाकर 7 साल तक की जा सकती है। साथ ही, कोई व्यक्ति अपने प्राइवेट कामों में लगी महिला को छुपकर देखेगा, फोटो लेगा या वीडियो बनाएगा, तो पहले अपराध के लिए उस पर कम से कम 1 साल की सजा है जो बढ़ाकर 3 साल तक की जा सकती है। आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है या दोनों ही लगाए जा सकते हैं।

क्या कहती है धारा 354 D

अगर कोई व्यक्ति मना करने पर भी बार-बार किसी महिला से संपर्क और बातचीत बढ़ाने की कोशिश करता है। उसके लिए वह इंटरनेट, ईमेल, सोशल मीडिया या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सहारा लेता है, या उस महिला पर निगरानी रखता है तो वह व्यक्ति धारा 354 डी का अपराधी होगा। इसमें दोषी पाए गए व्यक्ति पर अगर पहली बार अपराध है तो 3 साल की सजा और जुर्माना दोनों लगाए जा सकते हैं। यह एक जमानती अपराध है। अगर वह व्यक्ति आईपीसी 354 डी का दूसरी बार अपराध करता है तो उसे 5 साल का कारावास और जुर्माना दोनों लगाए जाएंगे। यह एक गैर जमानती अपराध है। इसमें व्यक्ति को अरेस्ट करने की पॉवर पुलिस के पास होती है। इस तरह से भारतीय दंड संहिता यानी Indian Penal Code भारत में कहीं भी किसी भी नागरिक की तरफ से किए गए अपराधों की परिभाषा करता है।

Tags:
Indian Penal Code   |  Parliament   |  Nirbhaya scandal   |  Section 354   |  British   |  IPC 354 A   |  India

Stories for you

SEARCH YOUR MP

Or

Selected MP