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WHO की दुनिया को नसीहत कोरोनावायरस को ना दें धार्मिक रंग!


Manmeet Singh
Manmeet Singh | 11 Apr, 2020 | 4:57 pm

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के देशों से अनुरोध किया है कि उन्हें कोरोना वायरस महामारी को धार्मिक रंग नहीं देना चाहिए। यह किसी भी प्रकार से सहायक नहीं है। इससे समाज में असंतोष नफरत एवं एवं द्वेष की भावना उत्पन्न होगी।

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Points
कोरोनावायरस को न दें धार्मिक रंग: विश्व स्वास्थ्य
संगठन स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की निंदा
निजामुद्दीन मरकज से जुड़ा है मामला
इंदौर में हुआ था स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला

क्या कहा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपातकालीन कार्यक्रम निदेशक माइक रयान के अनुसार: "यह किसी भी प्रकार से मददगार नहीं है।" COVID-19 का होना किसी की गलती नहीं है, हर मामला एक पीड़ित का है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हमें नस्लीय, धार्मिक और जातीय आधार पर मामलों को प्रोफाइल नहीं करना चाहिए।”

क्या है मामला

गौरतलब है कि दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके से तब्लीगी मरकज में शामिल 2000 से अधिक  लोगों को निकाला गया था। देश के 15 से ज्यादा राज्यों में भ्रमण करने के बाद अन्य लोगों के इनके संपर्क में आने की वजह से देश में कोरोना के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं। इस घटना के बाद ही मामले ने तूल पकड़ा है और विश्व पटल पर एक चर्चा का विषय बना हुआ है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में कोरोना के मामले 7 दिन में दोगुने हो रहे थे लेकिन तबलीगी जमात से जुड़े मामले सामने आने के बाद यह मामले मात्र 4.1 दिन में ही दोगुने होने लगे। 4 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि भारत में 30 प्रतिशत COVID-19 मामले जमात के कारण आए। 3 अप्रैल को, उन्होंने कहा कि 17 राज्यों में जमातियों के कारण मामले तेज़ी से बढ़े हैं।

क्या है वजह

कोरोना वायरस के धार्मिक रंग के पीछे एक बड़ी वजह जमातियों द्वारा किया गया  दुर्व्यवहार है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र दिल्ली समेत देश के अन्य राज्यों में जमातियों ने स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार, नर्स से बदतमीज़ी, जांच में असहयोग, अपनी पहचान छुपाना, आइसोलेशन के नियमों का पालन न करने जैसी खबरें सामने आई हैं। देश के कई राज्यों में  हजारों जमातियों के खिलाफ मामले भी दर्ज किये गए हैं। ऐसी अमानवीय हरकतों से किसी भी मामले को धार्मिक रंग देने में बल मिलता है।

विदेश में भी विरोध विरोध

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पकिस्तान के सिंध प्रांत में भी जमातियों का विरोध देखने को मिला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलाने में उनका बड़ा योगदान है।

सामाजिक असंतुलन

रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के ऊना में तबलीगी जमात से जुड़े एक युवक ने समाज के तानों से तंग आकर खुदकुशी कर ली। हालांकि बाद में पाया गया कि वह कोरोना संक्रमित था। ऐसे ही एक आत्महत्या की घटना उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से भी सामने आई।

स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की भी निंदा

इंदौर में  जांच करने गए स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले के संदर्भ में माइक रायन ने यह भी कहा- " स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का विचार भय और गलतफहमी से प्रेरित है लेकिन यह वास्तव में अस्वीकार्य है। हम अपने स्वास्थ्यकर्मियों को अपने नायक के रूप में देखने के लिए प्रत्येक समुदाय से अनुरोध करते हैं और हर तरह से उनका समर्थन कर सकते हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं  पर हमले बेहद निंदनीय कृत्य हैं। उनकी सुरक्षा के लिए हर कदम उठाया जाना चाहिए।"

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