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राज्य सरकारें लॉकडाउन में शराब की दुकान क्यों खोलना चाहती हैं

शराब की दुकानें खोलने के लिए केन्द्र पर पड़ रहा दबाव, क्या आर्थिक दुहाईंयाँ दे रही हैं राज्य सरकारें

Archna Jha
Archna Jha | 23 Apr, 2020 | 2:46 pm

कोरोना की वजह से लॉकडाउन के चलते देश के तमाम हिस्सों से रोज़ नईं ख़बरें आ रही हैं। जिनमें से एक के मुताबिक 22 अप्रैल को पंजाब के मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन की वजह से राज्य के कर-राजस्व में आई कमी और वित्तीय घाटों के चलते केन्द्र सरकार से शराब की बिक्री को पुन: शुरु करने की मांग की है। इतना ही नही, इससे पूर्व केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने भी राज्य में आई आर्थिक समस्याओं का हवाला देते हुए इस कारोबार को फिर से शुरु करने की मांग की। वहीं दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने भी, पिछले हफ्ते कर राजस्व में आई कमी का ज़िक्र किया, जिसमें सभी मंत्रियो को वेतन के अतिरिक्त भत्ते न दिए जाने की बात भी कही, साथ ही मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केजरीवाल ने एक्साइज़ विभाग से शराब की बिक्री शुरु करने की मांग की है।

Main
Points
लॉकडाउन के चलते राज्यों में आये वित्तीय संकट, शराब उघोग को फिर से शुरु करने की मांग कर रही हैं सरकारें
पंजाब, केरल, दिल्ली, हरियाणा और पूर्वोत्तर के राज्यों से उठ रही मांगे
देश को 2 लाख करोड़ का राजस्व देता है शराब उघोग- सीआईएबीसी
तकरीबन 40 लाख किसानों की आजीविका इस पर निर्भर- सीआईएबीसी
दिल्ली सरकार को ही हर महीने राजस्व में हो रहा 500 करोड़ का नुकसान

क्या तर्क दे रही हैं राज्य सरकारें

लॉकडाउन के दौरान बंद हुए शराब के कारोबार को फिर से शुरु करवाने के लिए राज्य सरकारें तमाम दुहाईयाँ देकर केन्द्र सरकार पर दबाव बना रही है जैसे- राजस्व के सभी स्रोत बंद हो गए है, जिससे आमदनी भी बंद हो गई है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों को केवल शराब उघोग से ही 25% टैक्स रेवन्यू की प्राप्ति होती थी, जो अब नही हो रही। लॉकडाउन के चलते शराब की बिक्री भले ही रुकी हो, पर अब इस क्षेत्र में कालाबाज़ारी बढ़ रही है। शराब के आदी लोगों को चिकित्सीय परेशानियाँ हो रही हैं, जिसके चलते वे आत्महत्या तक की कोशिश कर रहे हैं।

सीआईएबीसी का क्या कहना है

शराब विक्रेताओं के संगठन कंफेडरेशन आफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज़(CIABC) ने केन्द्र सरकार से अपील की है कि “शराब उघोग विभिन्न करों के ज़रिये देश को करीब 2लाख करोड़ का राजस्व देता है। इतना ही नही, इससे करीब 40लाख किसानों की रोज़ी-रोटी चलती है। साथ ही, कहीं न कहीं वर्तमान खराब हालातों में भी इस कारोबार के ज़रिये करीब 20 लाख लोगों को काम मिला हुआ है।” लॉकडाउन के पहले चरण के दौरान भी सीआईएबीसी ने वाणिज्य एंव उघोग मंत्री को शराब का कारोबार ठप्प होने की सूचना देते हुए मांग की थी कि – “कोविड-19 की रोकथाम के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए शराब की ऑनलाइन बिक्री और शराब दुकानों को खोले जाने की अनुमति दे दी जाए”।

बता दें कि कोरोना महामारी से निपटने और जनता को चिकित्सीय सुविधाएं देने के लिए राज्य सरकारों को, शराब के अतिरिक्त अन्य माध्यमों से होने वाली अपनी आमदनी से व्यय करना पड़ रहा है। तमाम मीडिया रिपोर्टस् के मुताबिक दिल्ली सरकार को केवल इस कारोबार से ही 5000 करोड़ के प्राप्त होने वाले राजस्व में हर महीने 500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं यूपी सरकार ने भी लॉकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियों में दी जाने वाली छूट में शराब और बीयर उत्पादन को शुरु करने की अनुमति दे दी है। जिससे हरियाणा, असम, अरुणाचल प्रदेश एंव अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में शराब बनाने वाली कंपनियों को सरकार से ढ़ील मिलने की उम्मीद जगी है।

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Corona   |  Lockdown   |  centergovt.   |  stategovt.   |  liquorshops   |   revenewloss   |  forcedtoope

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